यात्राएं अपने रोजमर्रा के जीवन से बाहर निकलने के अलावा बहुत कुछ सिखाती हैं। अव्वल तो हम प्रवास की उन जगहों, इलाकों के बारे में गहराई से जान पाते हैं और दूसरे वहां के समाज की समझ भी बढ़ती है।…
नंदलाल बोस एक महान भारतीय चित्रकार थे, जिन्होंने आधुनिक भारतीय कला को नई दिशा दी। उनका जन्म 1882 में हुआ और उन्होंने शांति निकेतन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय संविधान की मूल प्रति को सजाने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त…
अनूपपुर में संपन्न हुआ भारतीय जन नाट्य संघ का राज्य सम्मेलन हरनाम सिंह वैचारिक रूप से जनप्रतिबद्ध कला और जन संस्कृति का संरक्षक और संवाहक भारतीय जन नाट्य संघ का मध्य प्रदेश का दसवां राज्य सम्मेलन छत्तीसगढ़ की सीमा…
सत्ता, सेठ और समाज में बढ़ी पूंजी की हवस ने अब पवित्र तीर्थों को पैसा कूटने वाले पर्यटन-स्थलों में तब्दील कर दिया है। यह इस हद तक हो रहा है कि तीर्थस्थलों के आसपास के लोगों, पर्यावरण और जीवन तक…
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में प्रदर्शित ऐतिहासिक फोटोग्राफिक प्रदर्शनी नई दिल्ली, 12 मार्च। प्रख्यात फोटो पत्रकार और द इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व फोटो संपादक रोशन लाल चोपड़ा के दुर्लभ श्वेत-श्याम छायाचित्रों पर आधारित प्रदर्शनी “फ़्रेम्स ऑफ़ इटर्निटी” इन दिनों…
झाबुआ से लौटकर कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट झाबुआ, 2 मार्च। आदिवासी अंचल का प्रसिद्ध लोकपर्व भगौरिया इस बार झाबुआ के उत्कृष्ट मैदान में पूरे उत्साह, परंपरा और बदलते सामाजिक-राजनीतिक रंगों के साथ देखने को मिला। होली से पहले लगने वाले…
देशभक्ति, संस्कृति, पर्यावरण, यातायात और नागरिक बोध को जोड़ते हुए 30 जनवरी तक होंगे दस प्रमुख आयोजन इंदौर, 11 जनवरी। गणतंत्र दिवस को केवल एक दिन का औपचारिक उत्सव न मानकर उसे जनभागीदारी, रचनात्मकता और नागरिक चेतना के महोत्सव में…
शिवपुरी, 7 जनवरी। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार प्रमोद भार्गव को कहानी लेखन के क्षेत्र में “विद्योत्तमा सम्मान” से अलंकृत किया जाएगा। श्री भार्गव को उनका 2024 में प्रकाशित कहानी संग्रह “प्रमोद भार्गव की चुनिंदा कहानियां” पर दिया जाएगा।…
अगले साल होने वाले बंगाल विधानसभा के चुनाव ने हमें अचानक ‘वंदेमातरम’ के डेढ़ सौवें वर्ष की याद दिला दी है, लेकिन इस तात्कालिक जरूरत के बावजूद ‘वंदेमातरम’ हमारे बेहद गौरवशाली अतीत को उजागर कर देता है। अरविंद जयतिलक भारत ‘वंदेमातरम’ गीत…
राम मंदिर पर स्थापित केसरिया ध्वज ने कोविदार वृक्ष के प्रतीक और उसकी प्राचीन परंपरा को फिर केंद्र में ला दिया है। रघुकुल के ध्वज से जुड़े इस वृक्ष को लेकर कचनार-कोविदार की पहचान, आयुर्वेदिक मतभेद और वैज्ञानिक अध्ययनों ने…