देश धंसेगा सबके यत्नों से . . .
कहा जा रहा है कि संवैधानिक बदलाव के लिए 850 सदस्यों वाली संसद बनाने की जुगत में सत्ताधारी भाजपा देशभर की राजनीतिक जमातों को ललचाकर, धमकाकर, डराकर विखंडित करने में लगी है। मीनाक्षी नटराजन के प्रकरण को देखें तो इस…
भय और धमकियों से भरा लोकतंत्र
पश्चिम बंगाल चुनाव ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा हालत को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। भारी सुरक्षा, प्रशासनिक हस्तक्षेप, भय और अविश्वास के माहौल ने यह सवाल तेज कर दिया…
जनगणना 2027 : डिजिटल युग में भारत की सामाजिक-राजनीतिक पुनर्रचना
‘जादूगर’ शब्द से क्यों डरती है सत्ता?
संसद में ‘जादूगर’ जैसे हल्के-फुल्के शब्द पर मचा विवाद यह संकेत देता है कि भारतीय राजनीति से हास्य और सहजता तेजी से गायब हो रही है। संवाद की जगह कटुता और आक्रामकता ने ले ली है, जहां व्यंग्य भी असहजता…
महिला आरक्षण : सशक्तिकरण की पहल या राजनीतिक रणनीति?
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार का विशेष सत्र बुलाना जहां एक ओर नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं इसके पीछे राजनीतिक रणनीति के सवाल भी उठ रहे हैं। परिसीमन, जनगणना और चुनावी…
‘मनरेगा’ को मारकर आया ‘जी राम जी’
बीस साल पहले जिस संसद ने रोजगार की मांग आधारित गारंटी के जिस अनूठे कानून को सर्वसम्मति से पारित किया था, उसी संसद ने अभी पिछले हफ्ते उसी कानून को खारिज कर नए ‘वीबी – जी राम जी’ कानून को…
विचार : भाषा की भद्द पीटने वाले चुनाव
क्या भाषा की बरबादी में राजनीतिक नेतृत्व, खासकर सत्तानशीन नेतृत्व की भी कोई भूमिका होती है? आपस के बहस-मुबाहिसों से लगाकर चुनावी सभाओं तक में जिस अदा से जैसी भाषा का उपयोग किया जाता है वह उसे लगातार गर्त में…
बिहार चुनाव : जाति का वर्चस्व बनाम विकास और ‘पावरलेस’ की राजनीति’
बिहार, जिसे भारतीय लोकतंत्र की प्रयोगशाला कहा गया है, आज फिर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। ऐतिहासिक राजनीतिक चेतना और आंदोलनों की भूमि होने के बावजूद, यहां चुनावी परिदृश्य अब भी जाति, वर्चस्व, बूथ प्रबंधन और पैसों के प्रभाव…
‘बदलो बिहार अभियान’ के तहत सामाजिक न्याय और विकास पर चर्चा
विकास के सतत और समावेशी मॉडल पर जोर : तुषार गांधी समेत नामी कार्यकर्ता शामिल हाजीपुर, 31 अक्टूबर। बिहार के हाजीपुर में आज सामाजिक न्याय, राज्य के विकास और जनता के बुनियादी मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया…
संसाधन : लूटने को ललचाता लद्दाख
कुछ दिन पहले तक केन्द्र की भाजपा सरकार के लाडले माने जाने वाले सोनम वांगचुक और उनके संगी-साथी अचानक देशद्रोही, विदेशी पूंजी पर पलने वाले और हिंसा भडकाने वाले कैसे और क्यों हो गए? ध्यान से देखें तो सरकारों का…









