कानून

डॉ. राजेंद्र सिंह की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने उठाए सवाल, सिजीमाली खनन से पर्यावरण और आदिवासी जीवन पर खतरे का दावा

सिजीमाली बॉक्साइट खनन पर व्यापक अध्ययन के बाद जल बिरादरी मीडिया सम्मेलन 2 जून, भवानीपटना, कलाहांडी। प्रसिद्ध जल संरक्षणवादी और मेगसेस अवार्ड से सम्‍मानित डॉ. राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जल बिरादरी फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने हाल ही में…

सुप्रीम कोर्ट : धर्म और जाति के बीच फँसा न्याय

आम धारणा है कि अनुसूचित जातियां और जनजातियां कानून, समाज और सरकार की नजर में कमोबेश एक नहीं तो आसपास ही हैं। इसी के चलते बरसों ‘अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग’ और उनसे जुड़े कानून एक ही माने, बनाए जाते थे।…

पर्वत संरक्षण कानून के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान का आह्वान

तीन प्रमुख हस्तियों न्यायमूर्ति गौड़ा, डॉ. राजेंद्र सिंह और बोलिसेट्टी सत्यनारायण ने जारी किया घोषणा पत्र बैंगलोर, 24 मई 2026। जमशेदपुर, झारखंड में 22 एवं 23 मई 2026 को आयोजित राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में सर्वसम्मति से स्वीकृत घोषणा पत्र को…

संविधान का सम्मान और जनसहभागिता से ही नदियों-पहाड़ों की रक्षा

नदी और पहाड़ केवल प्रकृति के प्रतीक नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जीवन के आधार हैं। जब नदियाँ बीमार होती हैं और पहाड़ घायल होते हैं, तब समाज का संतुलन भी डगमगाने लगता है। आज जलवायु संकट, अंधाधुंध खनन और…

सामयिक : अपने-अपने ‘एपस्टीन’

इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’ ने साबित कर दिया है कि असीमत पूंजी इंसान की अंतर्निहित गंदगी को कई-कई गुना बढ़ाती, उजागर करती है। कहा जा रहा है कि खाड़ी देशों में जारी उठा-पटक और दुनिया…

वैश्विक समझौतों की बिसात पर छोटे पशुपालक

भारत सरीखे कृषि प्रधान देश में वैश्विक व्यापार समझौतों का सीधा असर कृषि और किसानों पर होता है। वैसे भी हमारे यहां कृषि और पशुपालन, प्राथमिक रूप से व्यापार की बजाए पेट भरने की तकनीक मानी जाती है और ऐसे…

केंद्र सरकार से किसानों का विश्वास टूटा, व्यापार समझौते और नए विधेयक किसान विरोधी — भाकियू

नई दिल्ली, 11 फ़रवरी। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने भारत सरकार द्वारा अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ किए गए हालिया व्यापार समझौतों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इन कदमों…

संविधान की रोशनी में गणतंत्र : गरीब कैदियों के लिए इंसाफ की पुकार

संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण काम उसे अमल में लाना है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते आजादी के अस्सी साल बाद भी हाशिये पर ही हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल में एक…

अरावली की परिभाषा अब संवैधानिक सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणविद् राजेंद्र सिंह की हस्तक्षेप याचिका स्वीकार की

नईदिल्‍ली, 20 जनवरी। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और संरक्षण से जुड़ी अपनी चल रही सुओ मोटो कार्यवाही में हस्तक्षेप की मांग करने वाली दायर एक अर्जी को स्वीकार कर लिया है। नियामक विखंडन और पारिस्थितिक…

‘मनरेगा’ को मारकर आया ‘जी राम जी’

बीस साल पहले जिस संसद ने रोजगार की मांग आधारित गारंटी के जिस अनूठे कानून को सर्वसम्मति से पारित किया था, उसी संसद ने अभी पिछले हफ्ते उसी कानून को खारिज कर नए ‘वीबी – जी राम जी’ कानून को…