गांधी दर्शन और विचार

‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के दौर में गांधीवादी युवा शिविरों की जरूरत और बढ़ी’ : मेधा पाटकर

राष्ट्रीय युवा संगठन के 30वें राष्ट्रीय शिविर का शुभारंभ कटक, 1 जून। राष्ट्रीय युवा संगठन का 30वां राष्ट्रीय शिविर रविवार को कटक स्थित न्यू स्टुअर्ट स्कूल परिसर में जन आंदोलनों की प्रख्यात नेत्री मेधा पाटकर के उद्घाटन के साथ शुरू…

“30 जनवरी” त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण

भागलपुर, 27 अप्रैल। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के सभागार में “30 जनवरी” नामक राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण सामूहिक रूप उपस्थित लोगों द्वारा किया गया । दिशा ग्रामीण विकास मंच बैजानी के अकादमिक पहल के अंतर्गत इस पत्रिका का प्रकाशन…

तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और महात्‍मा गांधी

रूस-यूक्रेन, इजरायल-गाजा के बाद अब युद्ध पश्चिम एशिया में केन्द्रित होता दिख रहा है। क्या समूचे, भरे-पूरे, जीवन्त देशों को एक-एक करके समाप्त करने का यह कारनामा कच्चे माल, उसे ‘पकाने’ में लगने वाली जरूरी ऊर्जा और बेचने के लिए…

भूदान आंदोलन के 75 वर्ष : भूमि, न्याय और नैतिकता की पुकार

इक्कीसवीं सदी के किसी भी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, स्थानीय, यहां तक कि मोहल्ले-पडौस के आपसी द्वंद्वों को देखें तो उनकी बुनियाद में भूमि के वितरण, विभाजन दिखाई देते हैं। ऐसे में साढ़े सात दशक पहले विनोबा भावे की अगुआई में हुए…

चंबल घाटी से फिर उठी अहिंसा की आवाज

भारत डोगरा             इस वर्ष 14 अप्रैल को चंबल घाटी में बागियों-डाकुओं के समर्पण के 54 वर्ष पूर्ण हुए। इस अवसर पर समर्पण करने वाले अनेक बागी यहां एकत्र हुए व उन्होंने अहिंसा व अमन-शांति की राह के लिए अपनी प्रतिबद्धता नए सिरे से दोहराई।…

14अप्रैल, 1972 : जब बागियों ने छोड़ी बंदूकें, तब शुरू हुई चंबल में शांति की नई बयार

चंबल घाटी, जो कभी भय और हिंसा का प्रतीक थी, वहाँ संत विनोबा भावे और बाद में जयप्रकाश नारायण के प्रयासों से अहिंसा और परिवर्तन की ऐतिहासिक धारा प्रवाहित हुई। 1960 से शुरू हुआ बागियों का आत्मसमर्पण आंदोलन 1972 में…

समर्पण से सशक्तीकरण : चंबल की विरासत और ‘शांति एवं महिला’ अभियान

14 अप्रैल को मनाया जाने वाला समर्पण दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब चंबल के बागियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण किया। यह घटना केवल कानून व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि मानव हृदय परिवर्तन की…

‘जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पटना से चंपारण यात्रा शुरू

लोकतंत्र और सद्भाव की विरासत को सहेजने का संकल्प पटना,10 अप्रैल। आज़ादी आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की हिफाज़त और मजबूती के लिए आज सुबह पटना स्थित जयप्रकाश नारायण के निवास स्थल, महिला चरखा समिति में…

गांधीवादी मूल्यों के प्रति समर्पित योद्धा थे रनसिंह परमार परमार

रनसिंह स्मृति सभा का आयोजन, एकता परिषद ने रूई से रूमाल, रूमाल से रोटी अभियान की शुरुआत की भोपाल, 7 अप्रैल। प्रख्यात समाजसेवी और गांधीवादी विचारक डॉ. रन सिंह परमार की स्मृति में यहां आयोजित सभा में एकता परिषद के…

विश्व शांति उपवास को मिला व्यापक समर्थन, गांधी चिंतक ई.पी. मेनन ने युवाओं की पहल को सराहा

बेंगलुरु में आयोजित एकदिवसीय उपवास में युवाओं ने दिया अहिंसा और सौहार्द का संदेश बंगलूरू, 3 अप्रैल। प्रसिद्ध गांधी चिंतक और कर्नाटक के वरिष्ठ सर्वोदय आंदोलनकारी ई.पी. मेनन ने आज गांधी भवन, बेंगलुरु में आयोजित विश्व शांति के लिए एक…