Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

राजगोपाल पीवी

चंबल घाटी में अहिंसा के लिए विद्यालय

हिंसा केवल बंदूक या संघर्ष का नाम नहीं, बल्कि शोषण, असमानता और अन्याय भी उसके रूप हैं। ऐसे में अहिंसक समाज की स्थापना केवल विचार नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक अभ्यास की मांग करती है। चंबल की धरती से प्रस्तावित ‘अहिंसा…

समर्पण से सशक्तीकरण : चंबल की विरासत और ‘शांति एवं महिला’ अभियान

14 अप्रैल को मनाया जाने वाला समर्पण दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब चंबल के बागियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण किया। यह घटना केवल कानून व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि मानव हृदय परिवर्तन की…

एकता परिषद : संगठन से समाज तक की यात्रा

यह जानना रोचक है कि करीब चार दशक पहले शुरु हुआ जन-संगठन ‘एकता परिषद’ अब उस समाज को अपने पैरों पर खड़ा कर पाने में सफल होता दिख रहा है जो शुरुआत में संसाधन-विहीन, निरक्षर और हाशिए पर था। यात्रा…

गांधी की सीख और आज की राजनीति का यथार्थ

करीब साढ़े चार दशक पहले ‘सप्रेस’ के सम्पादक को दिए एक वीडियो साक्षात्कार में ‘तिल्दा-आश्रम’ के आंगन में राजगोपाल पीवी ने कहा था कि उनके पास ‘गांधी विचार से प्रेरित सौ-सवा सौ मजबूत, प्रशिक्षित कार्यकर्ता, करीब एक लाख रुपए और…

‘चौमुखी’ पहल से समाज में शांति

वरिष्ठ गांधीवादी कार्यकर्ता एवं ‘एकता परिषद’ के संस्थापक राजगोपाल पीवी को हाल में जापान के प्रतिष्ठित ‘निवानो शांति पुरस्कार’ (2023) से नवाजा गया है। लगभग एक करोड 22 लाख रुपयों की पुरस्कार राशि से श्री राजगोपाल ने ‘शांति कोष’ की…

विचार : लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक व्यवहार

दुनियाभर में वापरी जा रही लोकतांत्रिक प्रणाली व्यवहार में कितनी कारगर है, यह उसके मैदानी अमल से उजागर होता रहता है। व्यक्ति और समाज के स्तर पर लोकतंत्र के कसीदे काढने वाले अपने निजी, राजनैतिक और सामाजिक जीवन में कितने…