जनगणना 2027 : डिजिटल युग में भारत की सामाजिक-राजनीतिक पुनर्रचना
शहरी विकास की कीमत : बढ़ता बाढ़ का खतरा
देश के कई शहरों में अनियोजित शहरीकरण, घटती हरियाली और आद्रभूमियों, जल निकासी तंत्र में अवरोध तथा बढ़ते कंक्रीट के कारण शहरी बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। मानसून में होने वाली तेज बारिश अब सामान्य जलभराव से आगे…
संकट में शेर
तरह-तरह के वन्यप्राणी प्रबंधन, भारी-भरकम बजट और पीढियों से बसे आदिवासियों को खदेडने – उजाडने के बावजूद जंगल का राजा शेर यानि बाघ लगातार मरता जा रहा है। जिस रफ्तार और तामझाम से बाघों को बचाने की मुहीम चलाई जाती…
असहमति से नफ़रत तक : लोकतंत्र की नैतिक परीक्षा
ढाई-तीन महीने पहले जन्मी ‘काक्रोच जनता पार्टी’ और उसके ‘जंतर-मंतर’ सत्याग्रह जैसे ‘जेन जी’ आंदोलनों समेत इन दिनों देशभर में अनेक प्रतिकार, खासकर युवा प्रतिकार उभर रहे हैं। इनकी क्या अहमियत है? क्या वे भी गांधी के जमाने के अहिंसक…
फरक्का का हिसाब : गंगा किसकी, पानी किसका और दर्द बिहार का?
गंगा के पानी का सवाल बिहार में केवल बाढ़ और सूखे के बीच का विरोधाभास नहीं, बल्कि खेती, मत्स्य जीवन, भूजल और नदी की पारिस्थितिकी से जुड़ा प्रश्न है। 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की समीक्षा के बीच फरक्का…
भर्ती का धंधा
इधर, नौकरियों और उनमें भर्ती करने की खातिर ली जाने वाली परीक्षाओं ने भारी-भरकम मुनाफा कूटने का एक नया गोरखधंधा पैदा कर दिया है। ध्यान रखें, यह धंधा वैध-अवैध दोनों तरीकों से किया जाता है। अपने शोध की बुनियाद पर…
पानी लौटे तो लौटता है गाँव का भविष्य
हमने विकास को अक्सर इस सवाल से मापा है कि कितना पानी निकाला जा सकता है, कितनी परियोजनाएँ बनीं और कितना धन खर्च हुआ। अब सवाल बदलने का समय है—एक भू-दृश्य टिकाऊ रूप से कितना पानी सँभाल सकता है? इस…
भोटकोशी बाढ़ से सबक लेकर हिमालयी देशों को संयुक्त मंच बनाना चाहिए : पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट
राष्ट्रीय हिमालय आयोग के गठन की पैरवी, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोग बनाने की मांग चमोली (उत्तराखंड), 28 अगस्त। प्रख्यात पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के नेता और गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित चंडी प्रसाद भट्ट ने शुक्रवार को नेपाल के रसुवा…
नेपाल प्राकृतिक आपदा : हिमालय अब जलवायु परिवर्तन का बोझ नहीं उठा सकता
हिमालय में बार-बार सामने आ रही प्राकृतिक आपदाएं अब महज स्थानीय घटनाएं नहीं रह गई हैं। नेपाल की हालिया त्रासदी ने एक बार फिर चेताया है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और बदलता मानसून हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी पर भारी…
भू-सांस्कृतिक मानचित्रण : स्वदेशी ज्ञान से सतत विकास की ओर
जब विकास प्रकृति, समाज और मनुष्य के बीच दूरी बढ़ा रहा है, तब स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक जीवन-पद्धतियों से सीखने की जरूरत बढ़ गई है। भू-सांस्कृतिक मानचित्रण इसी समग्र दृष्टि का माध्यम है, जो भूमि, जल, जंगल, कृषि, संस्कृति, आजीविका…
किशोर जायसवाल : बूंद-बूंद से भविष्य बचाने वाला जल योद्धा
जल संरक्षण की असली सफलता किसी संरचना के निर्माण में नहीं, बल्कि उसके सामुदायिक स्वामित्व में है। मुंगेर के किशोर जायसवाल ने अपने तीन दशक से अधिक के काम में इसी विचार को आधार बनाया। जलग्रहण विकास से लेकर टिकाऊ…
























