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पर्यावरण

विचार

कुमार कृष्णन

नदी की गाद नहीं, उसके संतुलन को समझिए

बिहार की नई गाद प्रबंधन नीति ने नदियों से गाद निकालने की बहस को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह नहीं कि नदी में कितनी गाद है, बल्कि यह…

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अरविन्द मोहन

शिक्षा के आंकड़ों में छिपी बड़ी तस्वीर

विद्यार्थियों की घटती संख्या को केवल नामांकन के आंकड़े के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट शिक्षकों की उपलब्धता, विषय-विशेषज्ञता, बहु-कक्षा शिक्षण और…

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कुमार सिद्धार्थ

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस : हर देश के लिए जरूरी है, ‘शांति मंत्रालय’

पिछली सदी में युद्धों की वजह पूंजी और प्राकृतिक संसाधनों की लपलपाहट हुआ करती थी, लेकिन 21वीं सदी में होने वाले युद्ध पूंजी के अलावा केवल युद्ध के लिए ही…

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विवेक पिंटो

‘झोलावालों’ से ‘दिमागी नक्सल’ तक

स्वतंत्रता आंदोलन से अभी हाल तक हमारे यहां गैर-दलीय राजनीति की खासी हवा चली थी। इस दौर में तमाम बातों के अलावा अपने आसपास की दुनिया पर सवाल उठाना सिखाया…

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