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पर्यावरण
विचार
फरक्का का हिसाब : गंगा किसकी, पानी किसका और दर्द बिहार का?
गंगा के पानी का सवाल बिहार में केवल बाढ़ और सूखे के बीच का विरोधाभास नहीं, बल्कि खेती, मत्स्य जीवन, भूजल और नदी की पारिस्थितिकी से जुड़ा प्रश्न है। 1996…
भर्ती का धंधा
इधर, नौकरियों और उनमें भर्ती करने की खातिर ली जाने वाली परीक्षाओं ने भारी-भरकम मुनाफा कूटने का एक नया गोरखधंधा पैदा कर दिया है। ध्यान रखें, यह धंधा वैध-अवैध दोनों…
अरावली की नई परिभाषा : संरक्षण बचेगा या रास्ता खुलेगा खनन का?
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की प्रस्तावित नई परिभाषा के पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और कानूनी प्रभावों के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है। यदि नई परिभाषा से संरक्षित…
मार्क्स, गाँधी और प्रेमचन्द : हमारे समय का संवाद
प्रेमचन्द को केवल हिन्दी के महान कथाकार के रूप में नहीं, बल्कि हमारे समय के एक जीवन्त वैचारिक हस्तक्षेप के रूप में देखने का आग्रह करता है। बढ़ती असमानता, बाजारवाद,…
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