अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी…
बिहार : डिग्री कॉलेज तो खुल गए, गांधी कहां रह गए?
बिहार सरकार द्वारा 211 प्रखंडों में नए राजकीय डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इन महाविद्यालयों में गांधी विचार को स्थान न मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। शिक्षा यदि…
भोपाल में भाषाओं के भविष्य पर होगा मंथन, प्रख्यात भाषाविद् जीएन डेवी देंगे व्याख्यान
भोपाल, 28 जून। भारत की भाषाई विविधता, विलुप्त होती बोलियों और मातृभाषाओं के भविष्य पर देश के सबसे प्रतिष्ठित भाषा-चिंतकों में से एक प्रो. जीएन डेवी 30 जून को भोपाल में व्याख्यान देंगे। ‘हम सब’ और गांधी भवन के संयुक्त…
सुप्रीम कोर्ट में आठवीं की किताब : संस्थागत गरिमा बनाम शैक्षिक स्वायत्तता
‘एनसीईआरटी’ की आठवीं की किताब ने हाल में सुप्रीमकोर्ट में भारी बहस खड़ी कर दी है। किताब में न्यायपालिका की अनेक कमजोरियों पर ऊंगली रखी गई है, लेकिन हमारा न्यायतंत्र इसे बदनाम करने का प्रयास मानता है। तो क्या हमारे…
परीक्षा का डर नहीं, आत्मविश्वास का उत्सव मनाएं
आज परीक्षा केवल पाठ्यक्रम की नहीं, बच्चों के मनोबल की भी परीक्षा बनती जा रही है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अपेक्षाएँ और तुलना का दबाव छात्रों में डर और असुरक्षा पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सहयोगी माहौल, पर्याप्त विश्राम…
गैरबराबरी को बरकरार रखती, उच्च-शिक्षा
तरह-तरह की योजनाओं, अनुदानों और देशी-विदेशी विश्वविद्यालयों की बढ़ौतरी के बावजूद हमारी शिक्षा प्रणाली कुछ ऐसी है कि जिसमें औसत आर्थिक, बौद्धिक हैसियत वाले विद्यार्थियों की कोई पहुंच नहीं हो पाती। ऐसे में अपेक्षाकृत कम आर्थिक, बौद्धिक हैसियत वालों की…
सत्ता, विचारधारा और शिक्षा : ऐसे तो नहीं बनेगी भारतीय ज्ञान प्रणाली
भारतीय ज्ञान प्रणाली की दुहाई देने वाली सरकार के दौर में विश्वविद्यालयों में विद्वता, गरिमा और बौद्धिक स्वतंत्रता पर अभूतपूर्व संकट गहराता जा रहा है। बिलासपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ कुलपति के अशोभनीय व्यवहार से लेकर…
औद्योगिक ज़हर से जलवायु ज़हर तक : महिलाओं की सुरक्षा अब भी नीतियों के हाशिये पर
2 दिसंबर सिर्फ एक स्मृति-दिवस नहीं, उस सच का आईना है जिसे भोपाल गैस त्रासदी ने उजागर किया था—पर्यावरणीय संकट कभी बराबरी से नहीं चोट पहुँचाते। विषैली हवा, बढ़ती गर्मी, जल-संकट और घरेलू धुएँ का सबसे भारी बोझ आज भी…
शिक्षा व्यवस्था : रट्टामार परीक्षा प्रणाली का रचनात्मक विकल्प
पीढियों से हमारे यहां परीक्षा की एकमात्र तरकीब वापरी जा रही है – सालभर रट्टा मारकर आखिरी कुछ दिनों में उसे उत्तर- पुस्तिकाओं में ‘उगलते’ रहने की, लेकिन क्या इससे विद्यार्थियों में प्रतिभा, समझ और रचनात्मकता विकसित होती है? यदि…
शिक्षा : नवाचार ही ‘नीलबाग स्कूल’ की पहचान
शिक्षा के क्षेत्र में कई नायाब प्रयोग हुए हैं और उनमें से कईयों ने हमें शिक्षण की पद्धतियों का दर्शन भी कराया है। कर्नाटक का ‘नीलबाग स्कूल’ इन्हीं में से एक है। यह सत्तर- अस्सी के दशक में चलने वाला…









