Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

अमित कोहली

सुप्रीम कोर्ट : धर्म और जाति के बीच फँसा न्याय

आम धारणा है कि अनुसूचित जातियां और जनजातियां कानून, समाज और सरकार की नजर में कमोबेश एक नहीं तो आसपास ही हैं। इसी के चलते बरसों ‘अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग’ और उनसे जुड़े कानून एक ही माने, बनाए जाते थे।…

गैरबराबरी को बरकरार रखती, उच्च-शिक्षा

तरह-तरह की योजनाओं, अनुदानों और देशी-विदेशी विश्वविद्यालयों की बढ़ौतरी के बावजूद हमारी शिक्षा प्रणाली कुछ ऐसी है कि जिसमें औसत आर्थिक, बौद्धिक हैसियत वाले विद्यार्थियों की कोई पहुंच नहीं हो पाती। ऐसे में अपेक्षाकृत कम आर्थिक, बौद्धिक हैसियत वालों की…

विवाह रिश्तों का द्वैत : सामाजिक बंधन या व्यक्तिगत आजादी

आजकल अखबार स्त्री-पुरुष संबंधों के टूटने, अक्सर हिंसक हो जाने और नतीजे में किसी एक या दोनों की मृत्यु की खबरों से अटे पड़े रहते हैं। क्यों हो रहा है, ऐसा? समाज में स्त्री की घटती हैसियत और पितृ-सत्ता के…

NGO : समाज के लिए सेवक

सत्ता और उसके विपक्ष की राजनीतिक जमातों के अलावा समाज में एक और धारा रही है जिसे ‘गैर-सरकारी संगठन’ (NGO) या स्वयंसेवी संगठन कहा जाता है। ये समूह या संगठन समाज में राहत, सेवा, संगठन, शिक्षण और विकास के काम…

इज़रायल और फिलिस्तीन : मध्य-पूर्व में मौत का तांडव

इन दिनों दुनियाभर को हलाकान करने वाले दो भीषण युद्धों में से एक,इजरायल और मध्य-पूर्व के देशों का है। इजरायल, जिसने हिटलर के हाथों अभी पिछली सदी में ही मानव इतिहास की भीषणतम त्रासदी झेली है,एक मदमस्त गुण्डे की तरह…

‘भारत रोजगार रिपोर्ट – 2024’ : युवा-रोजगार की पड़ताल

भारत अपनी बढ़ती युवा आबादी के साथ, एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। ‘मानव विकास संस्थान’ (आईएचडी) और ‘अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन’ (आईएलओ) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई ‘भारत रोज़गार रिपोर्ट – 2024’ युवाओं में रोज़गार के बहुआयामी परिदृश्य पर प्रकाश डालती है। भारत की युवा…

पर्यावरण के कितने अनुकूल हैं, बिजली के वाहन?

दुनियाभर में जलवायु-परिवर्तन के भयावह प्रभाव तबाही मचा रहे हैं और ऐसे में सभी को विकास के वैकल्पिक ताने-बाने की याद सताने लगी है। कोयला, पैट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन ‘ग्रीनहाउस गैसों’ का उत्सर्जन करते हैं और नतीजे में…

कोराना काल : पूंजीवाद में कोराना

कोविड-19 के इस मारक दौर में दवाओं, अस्पतालों, प्राणवायु और उसके सिलिन्डरों की भारी कमी है और उनकी कालाबाजारी तक हो रही है। क्या इसका बाजार की हमारी उस मौजूदा व्यवस्था से भी कुछ लेना-देना है जिसने नब्बे के दशक…

औषधि के रूप में उपयोगी : महुआ का तेल

आदिवासियों में महुआ एक बहु-उपयोगी पेड होता है, इसलिए कई जनजातियां उसे अपने देवी-देवताओं, पुरखों से भी जोडकर देखती हैं। महुए का एक उपयोगी उत्‍पाद है, तेल। इसके औषधीय गुणों की चर्चा आयुर्वेद में की गई है। महुआ के फूल,…

अध्यादेशों पर क्यों नहीं हैं किसान आंदोलन

संसद के मौजूदा सत्र में किसानों और किसानी को प्रभावित करने वाले उन तीन विवादास्‍पद अध्‍यादेशों के कानून बनने की संभावना है जिन्‍हें केन्‍द्र सरकार ने अभी जून में लागू करके देशभर के किसान संगठनों के बीच बवाल खडा कर…