हमारे फुटपाथ कौन हजम कर रहा?
आज़ादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि नागरिकों को सुरक्षित फुटपाथ के अधिकार के लिए सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़े, तो यह हमारे शहरी विकास मॉडल की बड़ी विफलता है। न्यायालय का हालिया फैसला पैदल यात्रियों के अधिकारों…
विकराल होती कटाव पीड़ितों की समस्या, जमीन और खेती बचाने की निर्णायक लड़ाई आरंभ
गंगा के किनारे बसे बिहार के मुंगेर, खगड़िया और बेगूसराय जिलों के हजारों परिवारों के लिए नदी केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते विस्थापन का कारण बन चुकी है। हर साल गंगा का कटाव सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन…
क्या रहने लायक बचे हैं, हमारे शहर ?
चालीस-पेंतालीस डिग्री सेल्सियस की चपेट में आए भारत, खासकर उत्तर भारत में अब आमफहम जीवन भी कठिन-से-कठिनतर होता जा रहा है। खुद के बनाए विकास के तौर-तरीकों से पैदा हो रहे ऐसे हालातों से आखिर कैसे निपटा जाए? इसी पर…
कैसे रोकें, राजस्थान के फैलते मरूस्थल को?
आधुनिक विकास के धतकरमों ने जिस तरह के संकट खड़े किए हैं, उनका निदान अब वापस पुरानी पारंपरिक पद्धतियों में ही दिखाई दे रहा है। मसलन, राजस्थान में फैलते मरुस्थलों को स्थानीय तौर-तरीकों, वनस्पतियों, झाड़-झंखाडों आदि से ही रोका जा…
बदइंतजामी से बेहाल मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ता
तेईस साल पहले ‘एशियन डेवलपमेंट बैंक’ के कर्ज के साथ मिले सलाह-नुमा-निर्देशों को मैदान में उतारने की खातिर ‘मध्यप्रदेश विद्युत मंडल’ को तीन तरह की कंपनियों में इसलिए विभाजित किया गया था, ताकि इससे मंडल का घाटा कम या समाप्त…
जल की उपलब्धता और शुद्धता का संकट
भारत में जल संसाधनों का असमान वितरण और तेजी से गिरता भूजल स्तर एक गंभीर संकट का संकेत है। बढ़ती खपत, प्रदूषण और कमजोर प्रबंधन के कारण स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। यदि समय रहते संरक्षण, पुनर्भरण और प्रभावी…
संविधान बनाम खनन : पचामा दादर में पर्यावरणीय न्याय की परीक्षा
मध्यप्रदेश के बालाघाट स्थित पचामा दादर बॉक्साइट ब्लॉक की प्रस्तावित खनन परियोजना पर्यावरणीय मानकों, जल संसाधन आकलन और वनाधिकार प्रावधानों की गंभीर अनदेखी के आरोपों में घिर गई है। अधूरी ईआईए रिपोर्ट, घटते भूजल स्तर, समृद्ध जैव विविधता वाले वन…
77वें गणतंत्र पर भारत : गर्व भी, प्रश्न भी, संकल्प भी
77वें गणतंत्र दिवस पर भारत अपनी उपलब्धियों पर गर्व करते हुए और चुनौतियों से आँख मिलाते हुए आत्ममंथन करता दिखाई देता है। युवा शक्ति, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी प्रगति देश को नई ऊँचाइयों तक ले जा रही है,…
बढ़ते शहरीकरण में पिछड़ता कचरा प्रबंधन
देश के दस लाख आबादी से अधिक के शहरों में इंदौर को स्वच्छता में अव्वल माना गया है, लेकिन हाल में उसी इंदौर में प्रदूषित पानी पीकर दस लोगों को अपनी जान गंवाना पड़ी और करीब 150 लोग बीमार हुए…
इंदौर : स्वच्छता के तमगे और दूषित पानी की सच्चाई
इंदौर को वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिलता रहा है, लेकिन दूषित पेयजल से हुई 14 मौतों ने इस छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा बताता है कि स्वच्छता के दावों के…









