अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी…
बिहार : डिग्री कॉलेज तो खुल गए, गांधी कहां रह गए?
बिहार सरकार द्वारा 211 प्रखंडों में नए राजकीय डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इन महाविद्यालयों में गांधी विचार को स्थान न मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। शिक्षा यदि…
भूमि का सवाल : सामाजिक न्याय की कसौटी
आज के दौर में जमीन सर्वाधिक कीमती जिन्स बन गई है। नतीजे में उसे लेकर देशभर में भारी उथल-पुथल, मारकाट मची है और भूमिहीन समाज हाशिए पर खदेड दिया गया है। ऐसे में, किन तौर-तरीकों से जमीन का न्यायपूर्ण, अहिंसक…
30 जून : अन्याय के संगठित लड़ाई का मार्ग दिखाता है हूल आंदोलन
30 जून 1855 को संथालों ने केवल अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध हथियार नहीं उठाए, बल्कि जल, जंगल और जमीन पर अपने अधिकार की ऐतिहासिक घोषणा भी की। 171 वर्ष बाद भी ‘हूल’ केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि विस्थापन, संसाधनों…
अमरनाथ झा : पत्रकारिता से नदी-पानी के जनसरोकार तक की अविस्मरणीय यात्रा
कुछ लोग अपने जाने के बाद भी स्मृतियों से नहीं, अपने विचारों और कर्मों से जीवित रहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ झा ऐसे ही विरल व्यक्तित्व थे, जिन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज, नदी, जल, जंगल और मनुष्य…
बिहार : खेती पर बढ़ते संकट के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान
स्वामी सहजानंद सरस्वती के 77वें महाप्रयाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा, सीतामढ़ी में ‘खेती के खतरे’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा के जिलाध्यक्ष जलंधर यदुवंशी ने…
विकराल होती कटाव पीड़ितों की समस्या, जमीन और खेती बचाने की निर्णायक लड़ाई आरंभ
गंगा के किनारे बसे बिहार के मुंगेर, खगड़िया और बेगूसराय जिलों के हजारों परिवारों के लिए नदी केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते विस्थापन का कारण बन चुकी है। हर साल गंगा का कटाव सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन…
पर्यावरण के लिहाज से पहाड़ एवं नदियों को बचाने की आवश्यकता
राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में नदियों और पहाड़ों के संरक्षण के लिए अलग और सशक्त कानून बनाने पर जोर झारखंड के जमशेदपुर में 22 व 23 मई को दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में देशभर से आए पर्यावरणविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक…
नंदलाल बोस की कला साधना एवं सर्जना
नंदलाल बोस एक महान भारतीय चित्रकार थे, जिन्होंने आधुनिक भारतीय कला को नई दिशा दी। उनका जन्म 1882 में हुआ और उन्होंने शांति निकेतन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय संविधान की मूल प्रति को सजाने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त…
सच्चिदानन्द सिन्हा : समाजवादी विचारधारा के जीवंत मशाल
समाजवादी चिंतक और लेखक सच्चिदानन्द सिन्हा का बुधवार को निधन एक युगांतकारी क्षति है। 98 वर्ष की आयु में विदा हुए सच्चिदानन्द बाबू ने अपनी गहन वैचारिक दृष्टि, सादगीपूर्ण जीवन और दो दर्जन से अधिक पुस्तकों के माध्यम से भारतीय…









