विकराल होती कटाव पीड़ितों की समस्या, जमीन और खेती बचाने की निर्णायक लड़ाई आरंभ

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गंगा के किनारे बसे बिहार के मुंगेर, खगड़िया और बेगूसराय जिलों के हजारों परिवारों के लिए नदी केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते विस्थापन का कारण बन चुकी है। हर साल गंगा का कटाव सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन और लोगों के घर निगल रहा है। लगभग 18 वर्षों से कटाव पीड़ित परिवार अपने अस्तित्व, खेती और आशियाने को बचाने के लिए संघर्षरत हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब भी दूर है।


गंगा नदी का कटाव एक विकराल समस्या है, जो हर साल सैकड़ों किसानों और परिवारों को बेघर कर रही है। बिहार के मुंगेर, खगड़िया, बेगुसराय के साथ-साथ की जिलों में यह समस्या है। हर साल गंगा का बढ़ता कटाव किसानों की जमीन निगल रहा है, घरों पर संकट खड़ा कर रहा है और हजारों परिवारों का भविष्य असुरक्षित बना रहा है। गंगा कटाव पीड़ितों का दर्द केवल बाढ़ के समय का नहीं, बल्कि हर साल अपना आशियाना और उपजाऊ जमीन गंवा देने का एक अंतहीन सिलसिला जारी है। हर साल कटाव के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि और लोगों के पक्के घर गंगा में समा जाते हैं।

तक़रीबन 18 साल से कटाव पीड़ित अपने अस्तित्व की रक्षा, खेती बचाने और जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। टीकारामपुर, दक्षिणी रहीमपुर, मध्य रहीमपुर, उत्तरी रहीमपुर और बरारी रघुनाथपुर समेत कई पंचायतों में गंगा का कटाव लगातार बढ़ रहा है। इससे खेती योग्य जमीन तेजी से नदी में समा रही है और कई परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा खड़ा हो गया है। समाजसेवी नागेंद्र सिंह त्यागी, राकेश कुमार मंडल और ई. धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि गंगा कटाव अब विकराल रूप धारण कर चुका है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हजारों परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विकास का एक अलग ही मॉडल चल पड़ा है। गंगा के किनारे मरीन ड्राइव की बात तो की जाती है, लेकिन गंगा के कटाव और विस्थापन का सवाल हाशिए पर है। तभी तो 18 साल से लगानी लड़ रहे हैं। इस क्षेत्र यानी दियारे की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती है। कटाव पीड़ितों ने अपनी पीड़ा का इजहार गंगा किनारे उपवास  कर रखा और गंगा मैया से मुक्ति की गुहार लगाई।

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मुंगेर सदर प्रखंड के टीकारामपुर में गंगा कटाव के स्थायी समाधान हेतु हो रहे जन आंदोलन के दूसरे चरण में गंगा पूजन एवं एकदिवसीय उपवास किया गया।

आंदोलन से  आरंभिक दौर से जुटे अनिल यादव  बताते हैं कि गंगा कटाव रोकने हेतु बंडाल के सवाल पर 2008 से ही आंदोलन का शुरुआत किया था। जो श्याम किशोर यादव, शिवनंदन यादव, जनार्दन यादव, इंद्रदेव यादव जैसे प्रबुद्ध लोगों के अगुवाई में लड़ा गया। जिसमें 2018 में कुछ सफलता भी मिली।

लंबे संघर्ष के बाद बिहार सरकार द्वारा चार लगभग पांच किलोमीटर बंडल 51 करोड़ की लागत से बनाया गया लेकिन विभागीय लापरवाही से बहुत जल्द बंडाल समाप्त भी हो गया। इस क्षेत्र के लोगों का मानना है कि एकजुट अहिंसात्मक संघर्ष से सरकार को झुकाने में अवश्य कामयाब होंगे।

अवध बिहारी संस्कृत कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. उमेश प्रसाद सिंह एवं सुभाष चन्द्र जोशी ने आंदोलन पर बैठे महिलाओं एवं पुरुषों में जोश भरते हुए कहा कि मानव जब जोर लगाता है तो पत्थर भी पानी बन जाता है। जिस दिन इस क्षेत्र के सशक्त नारी एवं पुरुष की इच्छाशक्ति मजबूत होगी, उसी दिन सरकार को कटाव पीड़ित परिवार के सामने घुटने टेकना होगा और स्थायी समाधान करना होगा।

इस आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारी पूर्व मुखिया पांडव यादव, वर्तमान मुखिया पांडव महतो, योगेंद्र यादव, राकेश यादव, ओमप्रकाश राय, पूर्व जिला परिषद सदस्य कृष्ण कुमार उर्फ मुन्ना यादव, विवेका यादव, मिंटू यादव, पप्पू यादव, शंकर यादव  रामपुर पंचायत के मुखिया कृष्णानंद यादव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय पोद्दार, चंद्रशेखर यादव उर्फ़ पप्पू यादव,राजद जिलाध्यक्ष संजय सिंह, साहेब महतो, संजय पोद्दार, देवकीनंदन यादव, उमेश यादव, बबलू यादव, कैलाश यादव, मिंटू यादव, पीयूष यादव, योगेंद्र यादव, ओम प्रकाश यादव, श्रवण कुमार यादव, आकाशदीप यादव, गजेंद्र हिमांशु, पूर्व जिप सदस्य अजीत सरकार, ध्रुव कुमार यादव, रंजीत यादव, सत्तो यादव, पंकज यादव, प्रवीण कुमार, राजीव महतो सहित बड़ी संख्या में सैकड़ों कटाव परिवार की मौजूदगी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि सर्वप्रथम बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर अपनी बातें रखेंगे।

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मुख्यमंत्री से इस क्षेत्र के लोगों को इसलिए उम्मीद है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कभी इस क्षेत्र यानी खगड़िया के परवत्ता से विधायक थे। दूसरे मुख्यमंत्री का गृहक्षेत्र मुंगेर जिले का तारापुर विधानसभा है और वहीं से विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो हम पांचों पंचायत की जनता अलग-अलग मुंगेर, खगड़िया और साहेबपुर कमाल के विधायक के साथ हीं मुंगेर खगड़िया एवं बेगूसराय के सांसद के घर पर से ही ‘घेरा डालो डेरा डालो’ आंदोलन आरंभ करेंगे। सरकार हमारी बात नहीं सुनेगी तो सांसद विधायक की तो अवश्य सुनेगी। इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेंगें।

युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने गंगा यह संकल्प दोहराया कि जिस आंदोलन के मशाल को इस क्षेत्र के प्रबुद्ध योद्धाओं ने जलाया उसे बुझाने नहीं देंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुंगेर, खगड़िया एवं बेगूसराय के गंगा कटाव से पीड़ित जनता अपने आपको मिटाकर एक साथ आवाज बुलंद करें तो गंगा कटाव के स्थायी समाधान से कोई ताकत रोक नहीं सकता।

अपने संबोधन में भाजपा नेता समाजसेवी ई. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि इस आंदोलन से क्या होगा, वैसे लोगों से स्पष्ट शब्दों में कह देता हूं कि इस धरती पर कोई ऐसा समस्या नहीं है, जिसका समाधान आंदोलन से संभव नहीं है। खगड़िया में दर्जनों उदाहरण है जो लंबे संघर्ष के बाद अंजाम तक पहुंचा है। रेल, रोड, पुल से लेकर उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान तक सफर संघर्ष के बलबूते तय हुआ है।

मुंगेर विधान सभा राजद के प्रत्याशी रहे अविनाश कुमार विद्यार्थी उर्फ मुकेश यादव ने दियारावासियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए उपवास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दियारावासियों की यह समस्या बरसों बरस से चली आ रही है। हर वर्ष सांसद, विधायक के द्वारा इस क्षेत्र के लोगों को झूठा आश्वासन देकर ठगकर सिर्फ वोट लेने का काम किया जाता रहा है लेकिन टीकारामपुर की जनता ने इस बार ठान लिया है कि जब तक गंगा कटाव को स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक यह चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा और इस आंदोलन को उन्होंने आगे भी मुस्तैदी और मजबूती से साथ देने का वचन दिया।

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कांग्रेस के मुंगेर ओबीसी अध्यक्ष राकेश कुमार मंडल ने कहा कि कटाव पीड़ितों की निर्णायक लड़ाई में उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का आंदोलन मुंगेर प्रमंडलीय मुख्यालय में किया जाना चाहिए। इसका सबों ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई खेती बचाने और जमीन बचाने की लड़ाई है। खेती ही इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का आधार है। जब खेती ही नहीं रहेगी तो खाद्य सुरक्षा की बात बेईमानी होगी।

गंगा कटाव से पीड़ित लोगों ने अपनी पीड़ा को लेकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए एक दिवसीय उपवास रखा और गंगा मईया से अर्जी लगाते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार से गुहार लगाई। कटाव की मार झेल रहे परिवारों का कहना है कि हर साल उनकी जमीन, घर और भविष्य गंगा में समा जाता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला है। पीड़ितों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मांग की है कि गंगा कटाव की समस्या पर गंभीरता से पहल कर ठोस एवं दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि हजारों गरीब परिवारों का जीवन सुरक्षित हो सके और उन्हें बार-बार विस्थापन का दर्द न झेलना पड़े।

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