बांध और विस्‍थापन विचार

कोशी पीड़ितों तक राहत क्षतिपूर्ति, पुनर्वास व अन्य कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के गैप को दूर किया जाए : जस्टिस अरुण कुमार

कोशी पीड़ितों तक राहत क्षतिपूर्ति, पुनर्वास व अन्य कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के गैप को दूर किया जाए : जस्टिस अरुण कुमार

कुमार कृष्णन सितंबर 2024 के आखिरी दिनों में नेपाल और बिहार के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद कोसी क्षेत्र में दशकों बाद आई विनाशकारी बाढ़ के लोंगों की ज़िन्दगी को तहस नहस कर डाला। इस बार तटबंध और...

कुमार कृष्णन

सितंबर 2024 के आखिरी दिनों में नेपाल और बिहार के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद कोसी क्षेत्र में दशकों बाद आई विनाशकारी बाढ़ के लोंगों की ज़िन्दगी को तहस नहस कर डाला। इस बार तटबंध और बैराज बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि कोशी नदी का पानी बैराज से ऊपर निकलने लगा, सुपौल जिले में पूर्वी तटबंध की सुरक्षा के लिए बने अनेक स्पर क्षत-विक्षत हो गए तो सहरसा, दरभंगा जिले में अनेक जगह तटबंध के ऊपर से पानी बह चला। अंत में दरभंगा जिले  कीरतपुर प्रखंड के भूभौल में तटबंध टूट गया। जिसके बाद सामने वाला गांव भूभौल पूरी तरह बर्बाद हो गया। इस भीषण बाढ़ में तटबंध के बीच के लोग भूखे -प्यासे  भयावह स्थिति में रहकर जान बचाए।

बाढ़ के बाद सरकार, राहत क्षतिपूर्ति के लिए बने अपने ही मानक संचालन प्रक्रिया और मानदर का अनुपालन करने में नाकाम रही है। जिनके घर बाढ़ या नदी के कटाव में विलीन हो गए या जानवर बह गए उसकी क्षतिपूर्ति अब तक नहीं मिली है। हर साल तटबंध के भीतर रह रहे पुनर्वास से वंचित लोगों को इस तरह की आपदा भोगने पर विवश हैं। उनके पुनर्वास की बात नहीं होती है।

कोशी नवनिर्माण मंच द्वारा अनेक बार उनकी मांगें उठाई गई, मांगपत्र भी दिया गया है, सुपौल में धरना भी आयोजित हुआ है पर कोई प्रगति नहीं दिख रही है। सरकार, प्रशासन और नागरिक समाज इन पीड़ितों को भूलता जा रहा है। इन समस्याओं की तरफ नागरिक समाज और सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने गांधी संग्रहालय, पटना में एक जनसुनवाई का आयोजन किया गया।

कोशी नवनिर्माण मंच द्वारा कोशी पीड़ितों की गृहक्षति सहित अन्य क्षतिपूर्ति दिलाने, कोशी तटबंध के भीतर के लोगों के पुनर्वास के सवाल पर पटना के गांधी संग्रहालय में यह जन सुनवाई आयोजित की गयी।

See also  बिहार : शराबबंदी के संकट

जनसुनवाई में सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड की बेला की रेखा देवी भूखे प्यासे बाढ़ में बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि बच्चों को छप्पर पर किसी तरह बैठाकर जान बचाए। उस पर भी सांप आ गया तो किसी तरह हटा कर छोटी नाव पर जान बचाए। हम लोगों को पुनर्वास नहीं मिला है सरकार पुनर्वास दे। वो अपने गांव में सांप काटने के बाद छोटी नाव में बैठाकर नदी पार करते समय बच्चे की हुई मौत की दर्दनाक कहानी बताई।

सुपौल अंचल के बलवा गांव के डुमरिया गांव की प्रमिला देवी ने कहा कि मेरा घर नदी में समा गया आज तक गृह क्षति भी नहीं मिली है दूसरे आदमी ने अपने घर में शरण दिया पर उनका घर भी छोटा था तो अंत में वहां से बांध पर आकर पल्ली डालकर रह रहे है। धूल और धूप से बच्चे बीमार हो रहे है। बाढ़ के समय ससुर बीमार थे दवा का उचित प्रबंध नहीं होने से उनकी मौत हो गई। सासू अंधी हो गई है तीन बच्चे है इन सभी के इलाज में एक लाख का कर्ज हो गया। इधर – उधर मजदूरी करके घर चला रहे है जब किसी को अपना घर बुहारते देखते है तो मन में टीस उठती है कि मेरा घर भी होता तो मै भी बुहारती। मेरे जिंदगी की एक ही तमन्ना है कि पुनर्वास मिले जहां मेरा अपना झोपडी भी बना लूं । मजदूरी करके अपना गुजर कर लेंगे।

संतोष मुखिया और आलोक राय ने नाव की अनुपलब्धता बाढ़ में हुई पीड़ा और पुनर्वास में दबंगों के अवैध कब्जे की बात कहते हुए कहा कि इसके अभाव में हम लोगों के गांव आज यहां है दूसरे साल कहीं और जाकर बसना पड़ता है। चन्द्रबीर नारायण यादव ने दरभंगा जिले के भूभौल के पीड़ितों को टूटे घरों को क्षति नहीं मिलने सहित अन्य वहां के नदी के सवाल को उठाया । कोशी महा सेतु के प्रभाव पर एडवोकेट अजीत मिश्रा ने बात रखी।

See also  बिहार : खेती पर बढ़ते संकट के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान

दयारानी देवी ने बाढ़ में कहा कि मेरे घर का बच्चा जब चौकी पर पानी आ गया तो छप्पर पर रखा उसके कुछ लाने गई तब तक बच्चा गिरकर पानी में बहने लगा। यह देखकर चिल्लाई और पानी में भागकर बचाई दो घंटे बाद उसका होश आया कुछ नहीं मिला है यदि पुनर्वास मिल जाता तो यह भोगना नहीं पड़ता। राजेन्द्र यादव ने नाव डूबने की खबर आने के बाद पानी में घर वाले जीवित है कि नहीं यह जानकारी नहीं मिलने पर ही पीड़ा का वर्णन करते हुए फफक उठे और बोले कि दो दिन बाद उनके जीवित होने की जानकारी दी। फूल कुमारी, अरणी देवी, बादामी देवी, प्रियंका, रेखना देवी, प्रदीप राम, सदरुल, अरविंद मेहता, बिजेंद्र सदा, शिव शंकर मंडल, चंद्र मोहन, भागवत पंडित  इत्यादि ने अपने दुःख भरी दास्तान सुनाई । 25 मार्च को जनसुनवाई में पटना विश्वविद्यालय की भूगोल प्रो देबरानी, सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल किशोर, इंदिरा रमण उपाध्याय, डॉ रिंकी, किरणदेव, जवाहर निराला, गांधीवादी रमन, अमर, सदानंद इत्यादि ने पीड़ित लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त किया। बाढ़ पीड़ितों की स्थिति के अध्ययन की जानकारी शोधार्थी आरिफ ने रखी।

जनसुनवाई को मुख्य अतिथि के रूप में  संबोधित करते हुए पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस अरुण कुमार ने कहा कोशी पीड़ितों की बातों से स्पष्ट हो रहा है कि इनके लिए आपदा और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गैप है जिसे दूर करना चाहिए। वहीं बिहार राज्य आपदा प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष और अवकाश प्राप्त वरिष्ठ आईएएस पदाधिकारी व्यास ने कहा कि लोगों की बातें सुनने से दो बातें समझ में आई है पहली तात्कालिक आपदा विभाग के बाढ़ पर बने मानक संचालन प्रक्रिया व मानदर को कोशी पीड़ितों को दिया जाए। दूसरा दीर्घकालिक मांग है जिसमें पुनर्वास देना और कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को सक्रिय करना है। उन्होंने आयोजकों को सलाह दिया योजनाओं के आपदा की तैयारियों व क्रियान्वयन में जन भागीदारी कर धरातल पर उतारने में मदद करें।

See also  विकराल होती कटाव पीड़ितों की समस्या, जमीन और खेती बचाने की निर्णायक लड़ाई आरंभ

प्रो पुष्पेंद्र ने कहा कि यह बहुत दुखद बात है कि कोशी के पीड़ितों को आज पटना में आकर अपनी विपदा की कहानी कहनी पड़ रही है। राहत पुनर्वास को सरकार को जल्द पूरा करना चाहिए। वहीं लोगों को सरकार नहीं सुनती है तो संगठन को मजबूत कर राजनैतिक मुद्दा के रूप में स्थापित करना होगा।

प्रो मधुबाला ने कहा कि राज्य के आपदा विभाग और प्राधिकरण मुख्यमंत्री के नारे पर चलती है कि सरकारी खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला अधिकार है पर आज कोशी पीड़ित लोगों की बातों को सुनने से लगता है कथनी और कहनी में अंतर है उसे अविलंब क्रियान्वयन करना चाहिए।

आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव को भी आमंत्रित किया गया था पर वे उनकी तरफ से कोई प्रतिनिधि भी नहीं आया। जन सुनवाई का संचालन महेन्द्र यादव और इंद्र नारायण ने किया।

जुड़ें - हमारे व्हाट्सएप चैनल से

सप्रेस मीडिया - नवीनतम आलेख, रिपोर्ट, समाचार अपडेट सीधे अपने व्हाट्सएप पर प्राप्त करें।

व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें →

निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करें

आज के दौर में निष्पक्ष, स्वतंत्र और जन-सरोकार की पत्रकारिता को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। विज्ञापनदाताओं और कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त होकर आप तक सही और सटीक खबरें पहुंचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आपकी दी हुई छोटी-सी सहयोग राशि हमें सच्ची पत्रकारिता करते रहने का संबल देगी।

सहयोग राशि →

नवीन आलेख