Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

वन्‍य जीव एवं जैव विविधता

जैव-विविधता की मार्फत बचाया जा सकता है, पर्यावरण

पर्यावरण बचाने की पहल जैव-विविधता को संरक्षित करने से शुरु होती है। जैव-विविधता को समझकर उसे बचाने की कोशिश पर्यावरण को भी चाक-चौबंद रख सकती है। क्या है, जैव-विविधता की अहमियत? इसे कैसे सजाया-संवारा जा सकता है? प्रकृति केवल एक…

पर्यावरण के लिहाज से पहाड़ एवं नदियों को बचाने की आवश्यकता

राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में नदियों और पहाड़ों के संरक्षण के लिए अलग और सशक्त कानून बनाने पर जोर झारखंड के जमशेदपुर में 22 व 23 मई को दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में देशभर से आए पर्यावरणविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक…

अरावली की परिभाषा पर सवाल : विरासत बनाम खनन का संघर्ष

अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुके हैं। स्वतः संज्ञान याचिका के तहत यह मुद्दा उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, जहां 100 मीटर ऊंचाई के आधार पर क्षेत्र सीमित करने पर विवाद…

ओरण के अस्तित्व के लिए ‘राष्ट्रीय गोसेवा नीति’

अरावली संरक्षण को लेकर उठे हाल के जनांदोलन ने एक बार फिर चरोखर यानि ‘ओरण’ और दुधारू पशुओं की अहमियत भी उजागर कर दी है। दरअसल पर्यावरण आसपास की तमाम-ओ-तमाम प्राकृतिक इकाइयों के मिलने से बनता है जिनमें चरोखर और…

“अरावली पर्वतमाला की पारिस्थितिकी, पर्यावरण और कृषि” विषयक अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव की जनघोषणा

उदयपुर। भारत और दुनिया से आए विशेषज्ञ एवं पर्यावरण चिंतक अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के साझा संकल्प के साथ उदयपुर में एकत्र हुए। 7–8 फरवरी को जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय) में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव, चौथे…

सोलर प्रोजेक्ट बनाम खेजड़ी : राजस्थान में संरक्षण की निर्णायक लड़ाई

राजस्थान में इन दिनों राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर बड़ा जन-आंदोलन उभरकर सामने आया है। बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में सोलर पावर परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कथित कटाई के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे…

पेड़ संसार : बेकार नहीं है बबूल !!

कभी, कहीं वृक्षारोपण करना हो तो बबूल का नंबर सबसे अंत में आता है। वजह है, बबूल से जुड़ी उसके नकारा होने की अफवाहें। अरावली पर्वत श्रृंखला के उजाड़े जाने की महती देशव्यापी चर्चा के बीच इस कांटेदार बबूल की…

रेडटेप आंदोलन के प्रणेता प्रभात मिश्रा को मिला ‘निर्मल कुमार जोशी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार’

बांदा, 04 फ़रवरी। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा के ग्राम अंधाव, बबेरू में चण्डी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र तथा मंगलभूमि फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं ‘रेडटेप आंदोलन’ के प्रणेता प्रभात मिश्रा को…

कृषि संसार वन्‍य जीव एवं जैव विविधता

नीलगाय और जंगली सुअर : खेती और नीति की समस्या

नीलगायों और जंगली सुअरों का फसलों को चौपट करने के लिए खेतों में उतरना एक तरह से कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ का ही नतीजा है। कई इलाकों में वन्यप्राणियों के वन-निवासियों से घातक द्वंद्व भी इसी पद्धति से उपजे हैं। इनसे…

अरावली बचाने के लिए पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह

नई दिल्ली 27 दिसंबर।  देश की प्राचीन और जीवनदायिनी अरावली पर्वतमाला पर गहराते संकट को लेकर प्रसिद्ध पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने न्यायालय से अरावली के संरक्षण के लिए…