Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

डॉ.कश्मीर उप्पल

विचार-विमर्श के ‘बीज-मंत्र’

बदहाली के मौजूदा समय से पार पाने या कम-से-कम उसका एक रास्ता पहचानने के लिए हम आखिर किसके पास जाएं? क्या हमें इस मशक्कत में अपने समय के लेखकों, संपादकों की कुछ मदद मिल सकेगी? हम लोगों के वरिष्ठ साथी…

चुनाव को समझने का एक सरल गणित

राजनीति में रूचि रखने वाले लोग चुनाव के रिजल्ट को आइंसटीन के कठिन सूत्रों की तरह समझने की कोशिश करते रहते हैं और इस कोशिश में वे किसी नेता की सभा में आई भीड़, टेलीवीजन चैनल, मीडिया, व्हाट्सएप आदि के सहारे अपने-अपने अनुमान…

दूर देश की दास्तान : एक भारतीय सैनिक की लोमहर्षक डायरी

अंग्रेज सेना के एक मामूली सिपाही शिशिर सर्बाधिकारी की डायरी न सिर्फ ‘प्रथम विश्वयुद्ध’ के प्रत्यक्ष अनुभवों और नायाब जानकारियों को उजागर करती है, बल्कि उस दौर के इतिहास को एक भिन्न नजरिए से पेश करती है। हिन्दुस्तानी सैनिक ब्रिटिश…

युवा : आज्ञाओं के असर में बेरोजगार

आज के दौर में भारत की अधिकांश कामकाजी आबादी युवा है, लेकिन उसे हम उपयुक्त रोजगार मुहैय्या नहीं करवा पा रहे। नतीजे में वह आज्ञाओं, आदेशों की दम पर खडी जमातों का हिस्सा बनकर तरह-तरह की वैध-अवैध गतिविधियों में लग…

‘आर्मेनियाई जनसंहार-ऑटोमन साम्राज्य का कलंक’ : नरसंहार के निहितार्थ

सत्ता और पूंजी की खातिर समाज को आपस में सतत युद्धरत, हिंसक बनाए रखने का नतीजा क्या एक व्यापक नरसंहार नहीं हो सकता? एक ऐसा नरसंहार जिसमें आम लोग अज्ञानतावश बडी शिद्दत से शामिल हो जाते हों? पिछले सौ-डेढ सौ…

स्वराज नहीं है, अंग्रेजी राज की समाप्ति

अगस्‍त ’47 में मिली आजादी ने क्‍या सचमुच हमें आजाद कर दिया था? क्‍या हम अपनी जरूरतों, संसाधनों और क्षमताओं के हिसाब से अपना विकास कर पाने के लिए स्‍वतंत्र हुए थे? और यदि यह हुआ था तो फिर हमारी…

लोकसत्ता कहीं गहरा अन्याय कर बैठे तो सत्याग्रह ही रास्ता है

11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष आज साम्प्रदायिक विद्वेष और उससे उत्पन्न हिंसा देश की सर्वाधिक गंभीर समस्या है। मंदिर-मस्जिद विवाद या ऐसे अन्य मसलों से साम्प्रदायिकता पैदा नहीं होती बल्कि साम्प्रदायिक भावना के कारण ये मसले पैदा होते…

पूंजीवादी नीतियों के बरक्स विकास का मॉडल

भारत में लोगों को रोजगार देने वाली पूंजी का कानूनी और गैर-कानूनी तरीके से देश से पलायन जारी है। नरेन्द्र मोदी बहुत तेजी से ‘विकास’ की रेल दौड़ा रहे हैं। वातानुकूलित डिब्बों में बैठे लोग चाहते हैं कि रेल और…