अरावली की नई परिभाषा : संरक्षण बचेगा या रास्ता खुलेगा खनन का?
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की प्रस्तावित नई परिभाषा के पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और कानूनी प्रभावों के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है। यदि नई परिभाषा से संरक्षित क्षेत्र घटता है या नियामकीय रिक्तियाँ पैदा होती हैं, तो…
विज्ञान : कैसे आई ‘कृत्रिम बुद्धि’
आजकल दुनियाभर में ‘एआई’ यानि ‘कृत्रिम बुद्धि’ पर भारी बवाल काटा जा रहा है। एक पक्ष इसे इंसानों को मिली बेहतरीन सुविधा मानता है तो दूसरा इसे इंसानी दिमाग को नकारा बनाकर मशीनों के गुलाम में तब्दील करने की तरकीब।…
मार्क्स, गाँधी और प्रेमचन्द : हमारे समय का संवाद
प्रेमचन्द को केवल हिन्दी के महान कथाकार के रूप में नहीं, बल्कि हमारे समय के एक जीवन्त वैचारिक हस्तक्षेप के रूप में देखने का आग्रह करता है। बढ़ती असमानता, बाजारवाद, लोकतान्त्रिक संकट और सामाजिक विघटन के दौर में यह विमर्श…
जंतर-मंतर की एक रात और भारत की एक सुबह
अपनी शिक्षा और रोजगार की बुनियादी मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे और लगातार राज्य की क्रूर हिंसा और अनदेखी को झेलते युवा हमारे समय और समाज को क्या सिखा रहे हैं? क्या वे ठीक उसी तरह का…
संसद में कृषि : पर्यावरण और बीजों की स्वायत्तता
शुरु होने वाले संसद के मानसून सत्र में कृषि, खासकर ‘बीज विधेयक’ पर चर्चा होने की संभावना है। अमरीका से जारी ‘ट्रेड डील’ की बातचीत के दौरान होने वाली यह चर्चा ‘डील’ के उन जरूरी मुद्दों को उजागर कर सकेगी…
यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति
भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक…
सिकुड़ते जंगल, बढ़ता भय — विकास की कीमत कौन चुकाएगा?
जंगल सिमट रहे हैं और वन्यजीव गांवों की ओर बढ़ रहे हैं। खेतों में हाथी, बस्तियों में तेंदुए और गांवों की चौखट तक पहुंचते बाघ केवल वन्यजीव संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि असंतुलित विकास की चेतावनी हैं। सवाल यह नहीं…
सब मज़ेदारी है ! कथा नीलगढ़’: विकास और समाज का आईना
क्या शिक्षा केवल स्कूल और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित है, या वह जीवन, समाज और मानवीय संबंधों को समझने का भी माध्यम है? ‘सब मज़ेदारी है! कथा नीलगढ़’ इसी सवाल की गहरी पड़ताल करती है। आदिवासी जीवन के बीच किए गए…
पवन ऊर्जा : ऊर्जा संकट और जलवायु चुनौती का हरित समाधान
विश्व पवन दिवस पर दुनिया भर में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के रूप में पवन ऊर्जा की महत्ता को रेखांकित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महासागरों में विशाल विंड फार्म स्थापित कर वैश्विक ऊर्जा जरूरतों का…
तेल के बदले एथेनॉल : समाधान जब समस्या बन जाए
पश्चिम एशिया में जारी महासंग्राम ने दुनियाभर में तेल का टोटा खड़ा कर दिया है। ऐसे में एक तरीका खाद्य फसलों के स्टार्च यानि मांड़ से बनाए जाने वाले एथेनाल का अजमाया जा रहा है। क्या होगा, जब पैट्रोलियम की…









