विश्व पवन दिवस पर दुनिया भर में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के रूप में पवन ऊर्जा की महत्ता को रेखांकित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महासागरों में विशाल विंड फार्म स्थापित कर वैश्विक ऊर्जा जरूरतों का…
पश्चिम एशिया में जारी महासंग्राम ने दुनियाभर में तेल का टोटा खड़ा कर दिया है। ऐसे में एक तरीका खाद्य फसलों के स्टार्च यानि मांड़ से बनाए जाने वाले एथेनाल का अजमाया जा रहा है। क्या होगा, जब पैट्रोलियम की…
देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं, फिर भी बाल मजदूरी, तस्करी, यौन शोषण और बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मानवाधिकार…
विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास…
आधुनिक विकास के धतकरमों ने जिस तरह के संकट खड़े किए हैं, उनका निदान अब वापस पुरानी पारंपरिक पद्धतियों में ही दिखाई दे रहा है। मसलन, राजस्थान में फैलते मरुस्थलों को स्थानीय तौर-तरीकों, वनस्पतियों, झाड़-झंखाडों आदि से ही रोका जा…
भारतीय दूरसंचार क्रांति के जनक सैम पित्रोदा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। मीडिया स्वराज के संपादक राम दत्त त्रिपाठी से एक साक्षात्कार में पित्रोदा ने आगाह किया कि एआई न केवल रोजगार के…
जीवन की अमूल्य जरूरत पानी के प्रति हमारी बेपरवाही ने अब ना तो उसे पर्याप्त मात्रा में छोड़ा है और न ही उसकी शुद्धता बरकरार रखी है। आखिर क्यों हो रही है, पानी के प्रति यह बदसलूकी? कैसे हमारी प्यास…
यात्राएं अपने रोजमर्रा के जीवन से बाहर निकलने के अलावा बहुत कुछ सिखाती हैं। अव्वल तो हम प्रवास की उन जगहों, इलाकों के बारे में गहराई से जान पाते हैं और दूसरे वहां के समाज की समझ भी बढ़ती है।…
भारत में पंचायती राज व्यवस्था लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे 73वें संविधान संशोधन के जरिए संवैधानिक दर्जा मिला। वैदिक काल से चली आ रही स्थानीय स्वशासन की परंपरा को आधुनिक स्वरूप देते हुए…
भारत में 73वें संविधान संशोधन के जरिए मजबूत की गई पंचायत राज व्यवस्था का उद्देश्य ग्राम स्तर पर लोकतंत्र, विकास और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना था। लेकिन 33 वर्षों बाद भी यह व्यवस्था अपनी मूल भावना से भटकती दिख…