बिहार : खेती पर बढ़ते संकट के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान

स्वामी सहजानंद सरस्वती के 77वें महाप्रयाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा, सीतामढ़ी में ‘खेती के खतरे’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा के जिलाध्यक्ष जलंधर यदुवंशी ने की।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के उत्तर बिहार संयोजक डॉ. आनंद किशोर ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने वर्ष 1938 में बिहार की धरती से किसानों को “भगवान” की संज्ञा देते हुए साम्राज्यवादी और सामंती शोषण के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी खेती और किसान गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट जारी है तथा बड़े पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हित में किसानों की भूमि और कृषि उपज पर कब्जे की कोशिशें तेज हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील से खेती, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे देश की खाद्य एवं आर्थिक संप्रभुता प्रभावित हो सकती है। शहरीकरण और विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण तथा सैटेलाइट सिटी परियोजनाओं के जरिए किसानों की जमीन छीनी जा रही है। साथ ही खनन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वन भूमि और पेड़ों की कटाई को मंजूरी दिए जाने पर भी चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने किसानों से इन चुनौतियों के खिलाफ व्यापक संघर्ष के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

मोर्चा के उपाध्यक्ष चंद्रदेव मंडल ने कहा कि वैश्वीकरण के बाद से खेती पर कॉरपोरेट की नजर है और सरकार नया जमींदार वर्ग तैयार कर रही है। शिक्षक नेता विजय शुक्ला ने कहा कि खेती पर गहराते संकट के दौर में स्वामी सहजानंद के संघर्ष के रास्ते पर चलना समय की मांग है।

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शशिधर शर्मा ने कहा कि स्वामी सहजानंद का आंदोलन आज पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। अमरेंद्र राय ने सैटेलाइट सिटी परियोजनाओं को किसानों के लिए बड़ा खतरा बताया। महासचिव अवधेश यादव ने कहा कि सैटेलाइट सीतापुरम परियोजना के खिलाफ किसानों की व्यापक गोलबंदी आवश्यक है। मो. मुर्तुजा ने कहा कि देश का पेट भरने वाला किसान आज सबसे अधिक संकट और तबाही झेल रहा है।

बैठक में ट्रेड यूनियन नेता दिनेशचंद्र द्विवेदी, नंदकिशोर मंडल, अशोक निराला, डॉ. नवल प्रसाद यादव, अश्विनी कुमार मिश्र, रामसुरेश तिवारी, उपेंद्र आर्य, श्याम बिहारी पंडित, मदन मोहन ठाकुर, अधिवक्ता अशोक कुमार ठाकुर, पुरुषोत्तम कुमार, प्रियांशु कुमार सहित किसान नेताओं, शिक्षाविदों, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और छात्रों ने अपने विचार रखे तथा खेती पर बढ़ते संकट के खिलाफ आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया।

संगोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से किसानों के महान नेता और ‘किसानों के सूर्य’ स्वामी सहजानंद सरस्वती को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की गई।

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