अब तक लटका है, ‘सरदार सरोवर’ का पुनर्वास
‘सरदार सरोवर’ के शुरुआती दौर में तब के ‘नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण’ के उपाध्यक्ष सुशीलचन्द्र वर्मा ने अपनी किताब में दुनिया का सर्वोत्तम विस्थापन-पुनर्वास बताते हुए जिस तरह परियोजना के कसीदे पढ़े थे,आज वे धूल-धूसरित दिखाई दे रहे हैं। बांध…
अरावली विरासत जन अभियान : चार राज्यों के प्रतिनिधियों ने खनन रोकने और पर्यावरण संरक्षण पर उठाई बुलंद आवाज़
जयपुर, 8 दिसंबर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में आयोजित “न्याय निर्माण मेला” के दौरान हुए “अरावली बचाओ सम्मेलन” में अरावली पर्वतमाला से जुड़े चार राज्यों—राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली—के साथ-साथ देशभर के अनेक क्षेत्रों से आए लोगों ने एक स्वर…
घरेलू हिंसा का बढ़ता साया : घर की चुप्पी में दम तोड़ती आधी आबादी
भारत में घरेलू महिला हिंसा की ताज़ा तस्वीर गहरी चिंता पैदा करती है। WHO और NCRB के आँकड़े बताते हैं कि हर तीसरी महिला अपने ही साथी की हिंसा का शिकार होती है, लेकिन दर्ज मामले वास्तविक पीड़ा का छोटा…
पूंजी के लिए पर्यटन : किसका लाभ, किसकी हानि?
विनाशकारी विकास की हवस में हमारे सत्ताधारियों ने उन छह गांवों को सिरे से भुला दिया है जिनकी जमीनों पर साठ के दशक में ‘सरदार सरोवर परियोजना’ बनाने वालों की बस्ती बसाई गई थी। आजकल उसी इलाके में ‘स्टैच्यू ऑफ…
कॉरिडोर में कृष्ण : ‘कुंज गलियों’ का पर्यटन
धर्मांध भीड को अपने कर्मकांडों की खातिर ज्यादा जगह की जरूरत होती है और इस तर्क पर आजकल देशभर के प्राचीन धार्मिक स्थलों को भव्य ‘लोक’ में तब्दील करके उन्हें विस्तार दिया जा रहा है। अयोध्या, बनारस, प्रयागराज, उज्जैन आदि…
‘स्मार्ट सिटी योजना’ : पूंजी के लिए ‘प्राइवेट पार्टनर’
कुल जमा दस मिनट की बरसात में बाढग्रस्त हो जाने वाले, जल-मल निकासी के बजबजाते गटरों, टूटी-फूटी सडकों और बदहाल जलापूर्ति आदि से बदहवास शहरों को दस साल पहले स्मार्ट बनाने के मंसूबे बांधे गए थे। आज इस कारनामे को…
बिजली के लिए बेशर्मी : एक रुपये एकड़ में अडानी को जमीन
विकास के नाम पर की जा रही बेशर्मी की एक बानगी बिहार के भागलपुर के पीरपैंती में देखी जा सकती है जहां अडानी कंपनी को ‘अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल थर्मल-पावर परियोजना’ खड़ी करने के लिए केवल एक रुपया प्रति एकड़ किराए की…
कितने समावेशी, सुगम, सांस लेने लायक और लोकतांत्रिक बचे हैं, ‘स्मार्ट सिटीज़’
हमारे समय की विकास योजनाओं की त्रासदी है कि वे आस-पड़ौस के संसाधनों और समाज को तरजीह दिए बिना खड़ी की जाती हैं। ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ भी इससे हटकर नहीं है। करीब दस साल पहले बड़े धूम-धडाकों के साथ उतारी…
भारतीय अर्थव्यवस्था : जादूगर का अर्थशास्त्र
‘नमस्ते ट्रंप,’ ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’ और ‘माई फ्रेंड डोनॉल्ड’ की गलबहियों से छिटककर ‘लाल आंखें’ दिखाने वाले चीन और रूस की चापलूसी आखिर उसी अर्थ-नीति की देन है जो हमारे आम, गरीब-गुरबों को आए दिन रुलाती रहती है। क्या…
. . .जब ‘सरदार सरोवर’ को ‘नवागाम बांध’ कहा जाता था !
राजेन्द्र जोशी चार दशकों के ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की वर्षगांठ पर यह जानना बेहद रोचक हो सकता है आखिर इस लंबे संघर्ष कि शुरुआत कैसे हुई थी? कौन लोग थे जिन्हें पानी और उसके लिए बांधों की जरूरत के उस…









