विकास

बैल से खेती : राजस्थान की पहल का स्वागत है

कई बार सरकारें भी जनहित में कारगर फैसले ले लेती हैं। हाल में बैलों की खेती को प्रोत्साहन देने का राजस्थान सरकार का फैसला इसी तरह का है। ध्यान से देखें तो बैलों से की जाने वाली खेती का अर्थशास्त्र…

पहाड़ों में आपदा

भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले पहाड़ों में विकास योजनाओं की जिद ने जानलेवा आफतें खड़ी की हैं। नतीजे में पहाड़ और उन पर बसा जीवन लगातार आपदाओं की चपेट में बना रहता है। कमाल यह है कि…

बढ़ता तापमान : गर्मी से गहराता संकट

नई सरकार के गठन की आपाधापी में राजधानी दिल्ली समेत देश के अनके इलाके अपने जल संकट और उबलती गर्मी की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं खींच पाए। दिनों-दिन गहराते ये संकट क्या केवल राजनीतिक खींचतान की वजह से ही हैं?…

वैश्विक स्तर पर नई क्रांति की रचना में जुटा है भारत परिवार

चिंतन सम्मेलन में देश भर से जुटे दो सौ से ज्यादा चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता देश के आम लोगों को अब जगाने की ज्यादा जरूरत है क्योंकि सभी प्राकृतिक संसाधनों पर पूंजीपतियों का कब्जा हो रहा है। सरकारें तमाशबीन बनी…

ओडिशा : गायब होता गंधमार्दन पर्वत

ओडिशा के गंधमार्दन पर्वत पर एक बार फिर उत्खनन का हमला होने वाला है और इस बार यह निजी क्षेत्र की अडाणी कंपनी करने वाली है। अस्सी के दशक में सरकारी क्षेत्र की ‘बाल्को’ कंपनी को बॉक्साइट की आपूर्ति की…

खनिज संपदा के लिए दमन का नया केन्द्र : सिजिमाली, कुटरूमाली और माजनमाली

सुनील कुमार कलिंगनगर, नियमगिरि, जगतसिंहपुर (पोस्को), नारयणपटना, काशीपुर के बाद निगाह रायगड़ा़ जिले के सिजिमाली, कुटरूमाली और माजनमाली पर है। यहां पर बॉक्साइट का भंडार बड़ी मात्रा में है। कलिंगनगर, नियमगिरि, जगतसिंहपुर (पोस्को), नारायणपटना, काशीपुर के बाद निगाह रायगड़ा़ जिले के सिजिमाली, कुटरूमाली और माजनमाली…

विकास : साथ-साथ बढ़ती भुखमरी और सम्पन्नता

मौजूदा विकास की विडंबना है कि इसमें भीषण भुखमरी और असीमित सम्पन्नता एक साथ फलती-फूलती हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांचवें पायदान पर खड़े हमारे देश में करीब अस्सी फीसदी आबादी सरकारी दया की मार्फत मिलने वाले पांच किलो अनाज पर…

नगर नियोजन का नजरिया : बुच साहब के बहाने भोपाल

जिस तेजी से शहरों के विकास हो रहे हैं, उसने नगर-नियोजन की अहमियत कई गुना बढ़ा दी है। इसमें उस आबादी का खास महत्व है जो आसपास के गांव-खेडों से रोजगार की आस में शहरों की तरफ खिंची चली आती…

बिजली ‘सुधार’ : मुनाफे की कीमत पर अंधेरा

वीजू कृष्‍णन रोटी, कपडा और मकान की तरह बिजली भी जीवन की बुनियादी जरूरत बन गई है। जाहिर है, इन चारों अपरिहार्य उपादानों ने सेठों को अकूत पूंजी कूटने के भरपूर अवसर दिए हैं। बिजली क्षेत्र में सरकारें, तरह-तरह के…