नर्मदा का पानी पर्याप्त, संकट प्रबंधन और वितरण का : सेवा सुरभि जल विमर्श में निष्कर्ष
शहर के 6 लाख में से आधे घरों में ही वैध नल कनेक्शन, पानी पर खर्च होने वाले धन का पांचवा हिस्सा ही मिल रहा निगम के खजाने में- निगमायुक्त क्षितिज सिंघल इंदौर, 31 मई। शहर में पानी संकट के…
सुप्रीम कोर्ट : धर्म और जाति के बीच फँसा न्याय
आम धारणा है कि अनुसूचित जातियां और जनजातियां कानून, समाज और सरकार की नजर में कमोबेश एक नहीं तो आसपास ही हैं। इसी के चलते बरसों ‘अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग’ और उनसे जुड़े कानून एक ही माने, बनाए जाते थे।…
कैसी है ‘सुपर एल नीनो’ का सामना करने की हमारी तैयारी?
‘सुपर एल नीनो’ की आहट, कमजोर मानसून का खतरा और इनसे निपटने की देश की आधी-अधूरी तैयारी ने हमारे सामने कुछ बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘कोविड 19’ या हाल के खाड़ी संकट से उपजे हाहाकार को देखें तो…
लोकतंत्र को अपने वैभव का इंतज़ार
क्रिकेट की थकी और उबाऊ होती दुनिया में जैसे वैभव सूर्यवंशी अचानक आकर खेल की ऊर्जा, सौंदर्य और उम्मीद लौटा देता है, वैसे ही भारतीय समाज और लोकतंत्र भी आज किसी ऐसे ही साहसी, ताज़ा और जीवंत हस्तक्षेप की प्रतीक्षा…
मणिपुर : दुर्लभ-फूल उत्सव से शांति सद्भावना का प्रयास
मणिपुर की ऊँची शिरूई पहाड़ियों में खिलने वाला दुर्लभ शिरूई लिली फूल अपनी अनोखी सुंदरता और पारिस्थितिकीय महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। लुप्तप्राय श्रेणी में शामिल यह पुष्प राज्य में शांति और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है।…
नेहरू के पुण्य स्मरण के बहाने ‘भारतीयता’ की खोज !
क्या आज का भारत उस ‘भारतीयता’ से दूर होता जा रहा है जिसकी कल्पना पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में की थी? बदलते राजनीतिक-सामाजिक माहौल, धार्मिक पहचान के बढ़ते आग्रह और नागरिक स्वतंत्रताओं पर उठते सवालों के बीच…
केन-बेतवा परियोजना पर चिंता, छतरपुर में हुई विचार गोष्ठी
छतरपुर। स्थानीय गांधी स्मारक भवन में पिछले रविवार को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जल संकट, विस्थापन और जंगलों पर पड़ने वाले प्रभाव सहित…
उत्तराखंड : सरला बहन का बचाया जंगल अंतिम सांसें गिन रहा है
जिस जंगल को महात्मा गांधी की पुत्री मानी जाने वाली सरला बहन उर्फ कैथरीन मैरी हेइलमैन ने बचाया हो उस पर अब फिर से संकट के बादल घिर रहे हैं। वजह है, पूंजी पीटने की हवस में बढ़ाया जा रहा…
पर्वत संरक्षण कानून के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान का आह्वान
तीन प्रमुख हस्तियों न्यायमूर्ति गौड़ा, डॉ. राजेंद्र सिंह और बोलिसेट्टी सत्यनारायण ने जारी किया घोषणा पत्र बैंगलोर, 24 मई 2026। जमशेदपुर, झारखंड में 22 एवं 23 मई 2026 को आयोजित राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में सर्वसम्मति से स्वीकृत घोषणा पत्र को…
पर्यावरण के लिहाज से पहाड़ एवं नदियों को बचाने की आवश्यकता
राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में नदियों और पहाड़ों के संरक्षण के लिए अलग और सशक्त कानून बनाने पर जोर झारखंड के जमशेदपुर में 22 व 23 मई को दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में देशभर से आए पर्यावरणविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक…









