राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में नदियों और पहाड़ों के संरक्षण के लिए अलग और सशक्त कानून बनाने पर जोर झारखंड के जमशेदपुर में 22 व 23 मई को दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में देशभर से आए पर्यावरणविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक…
अभ्यास मंडल की 66 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यान माला समापन व्याख्यान इंदौर, 21 मई। मेजर जनरल डॉ. माधुरी कानिटकर ने कहा है कि देश में महिला आरक्षण लागू होने से पहले महिलाओं को इस व्यवस्था के लिए तैयार करना समाज की…
पर्वत संरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा देने की जरूरत पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विमर्श शुरू हो रहा है। 22 और 23 मई को जमशेदपुर में आयोजित सम्मेलन में पर्वतों को भारत की पहली राष्ट्रीय आधारभूत संरचना मानते हुए उनके संरक्षण,…
इन दिनों जारी ‘चार धाम यात्रा’ में तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी कमी महसूस की जा रही है। क्या इसकी वजह यात्रा के बढ़ते वे खतरे तो नहीं हैं जो सीमा से ज्यादा यात्रियों ने हाल के वर्षों में खड़े…
अभ्यास मंडल ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला इंदौर, 20 मई। राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यावरण प्रो. श्यामसुंदर ज्वाणी ने कहा है कि हमें हवा, मिट्टी और पानी की चिंता करना होगी। जब यह चिंता हम करेंगे तो पर्यावरण का संरक्षण स्वमेव हो जाएगा। केवल…
अभ्यास मंडल की 66 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला इंदौर, 19 मई। लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज कुमार सिन्हा ने कहा है कि जब समुदाय की परिभाषा हर व्यक्ति अलग-अलग रखेगा तो विवाद होंगे। हमें अपनी सफलता की परिभाषा का लक्ष्य राष्ट्र और विश्व…
इंदौर, 19 मई। मध्य प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री, समाजवादी नेता ओमप्रकाश रावल की धर्मपत्नी एवं नर्मदा बचाओ आंदोलन की वरिष्ठ सहयोगी कृष्णा रावल (90 वर्ष) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर से सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों,…
नागपुर जल संवाद-2026 में पद्म भूषण अनिल प्रकाश जोशी, नितिन गडकरी और नाना पाटेकर ने रखा जल, समाज और भविष्य का विजन नागपुर 18 मई। विदर्भ को किसान आत्महत्या मुक्त बनाने, जल संकट के स्थायी समाधान खोजने और जल संरक्षण…
धरती पर जीवन का ताना-बाना करोड़ों प्रजातियों से बुना गया है, लेकिन मानव सभ्यता की तेज़ रफ्तार ने इस संतुलन को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। आज विलुप्ति की रफ्तार प्राकृतिक दर से हजार गुना अधिक मानी जा रही…
इतिहास में कुछ गुमशुदगियाँ केवल व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरी सभ्यताओं की पीड़ा बन जाती हैं। गेडुन चोएकी न्यिमा की कहानी भी ऐसी ही एक जीवित त्रासदी है, जहाँ छह वर्ष का एक मासूम बालक अपनी आध्यात्मिक पहचान की कीमत…