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अब किसी आपातकाल की औपचारिक घोषणा नहीं होने वाली है।

बुखार और आपातकाल दोनों ही सूचना देकर नहीं आते। लक्षणों से ही समझना पड़ता है। वैसे भी अब किसी आपातकाल की औपचारिक घोषणा नहीं होने वाली है। सरकार भी अच्छे से जान गई है कि दुनिया के इस सबसे लम्बे…

सस्‍ती सरकारी बिजली पर भारी मंहगी निजी बिजली

आम लोगों के वोट की मार्फत सत्‍ता पर काबिज होने वाली सरकारें, अब हर तरह की लाज-शर्म को तिलांजलि देकर बेशर्मी से पूंजी और उद्योगों के हित में खडी हो गई हैं। मध्‍यप्रदेश में इसकी बानगी ऊर्जा या बिजली क्षेत्र…

कोरोना वायरस से स्थायी मुक्ति के लिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रशिक्षण

कोरोना वायरस से अस्थायी मुक्ति वैसे तो वैक्सीन और औषधियों से उपचार दिलायेगा, लेकिन स्थायी मुक्ति प्रकृति ही दिला सकेगी। प्रकृति को प्यार व सम्मान करने वाली जीवन पद्धति को अपनाने के लिए तरुण भारत संघ ने ‘‘आओ, कोविड-19 को…

विवाद के सभी मसलों को आपसी बातचीत से सुलझायें, युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं

सर्व सेवा संघ की अपील सेवाग्राम :  दुनिया में कहीं भी युद्ध हो हम उसके विरोधी हैं। सरकारों के निर्णयों के अनुसार सेनाओं को युद्ध में झोंक दिया जाता है। मंत्रीगण तो अपने कक्ष में बैठे रहते हैं, पर किसी मां का…

नर्मदा : बूँद- बूँद जल का दोहन

सौंदर्य की नदी नर्मदा में जितना भी सौंदर्य बचा है, वह भी यात्रा वृत्तांत के पन्नों में सिमटने वाला है। नर्मदा नदी के किनारे प्रस्तावित 18 थर्मल एवं परमाणु बिजली परियोजना की स्थापित क्षमता 25 हजार 260 मेगावाट है। 22…

जनता से भी तो पूछिए कि वह क्या चाहती है !

क्या जनता से भी पूछ लिया गया है कि वह पाकिस्तान के साथ केवल युद्ध और चीन के साथ सभी विकल्पों के लिए अपने आप को तैयार रखे ? युद्ध या बातचीत के बारे में क्या वे ही लोग सबकुछ…

सीमा पर तनाव और सत्ता के गलियारों में पसरा हुआ सन्नाटा !

देश की जनता को तो अभी भी सबकुछ साफ़-साफ़ बताया जाना शेष है। ऐसा होने वाला है कि जनता का ध्यान लद्दाख घाटी से हटाकर किसी नए संकट के लॉक डाउन में क़ैद कर दिया जाएगा ? प्रधानमंत्री के वक्तव्य…

जीवन, जीविका और जमीर : चीन को शिकार बनाकर निगल जाएगा

भारत-चीन सीमा विवाद और गलवन घाटी हिंसा राजेन्द्र सिंह चीन उन सभी मौका पर आगे आता है, जहां उसे दिखावटी नाम व प्रसिद्धि मिल सके और व्यवसाय में पैसा मिल सके। पैसा और प्रसिद्धि का भूखा चीन लेकिन अब दोनों…

संदेह के घेरे में नागरिकों का राष्ट्रप्रेम नहीं, नायकों का सत्ताप्रेम है !

चीन और पाकिस्तान के साथ अब तक हुई लड़ाइयों के अनुभव यही रहे हैं कि एक स्थिति के बाद नागरिक सरकार-आधारित स्रोतों को पूरी तरह से अविश्वसनीय मानने लगते हैं और सही सूचनाओं के लिए बाहरी स्रोतों पर ज़्यादा भरोसा…

लोकतंत्र में नागरिकत्व की प्राणप्रतिष्ठा

अनिल त्रिवेदी बहत्तर साल के लोकतंत्र में भारत के नागरिकों में लोकतांत्रिक नागरिक संस्कार और नागरिक दायित्वों की समझ और प्रतिबध्दता का स्वरूप कैसा हैं? इस सवाल का उत्तर ही तय करेगा भारत के नागरिक अपने जीवनकाल में नागरिक दायित्व…