गांधी दर्शन और विचार शख्सियत समाचार

विनोबा परंपरा के अग्रणी कर्मयोगी बालविजयजी के निधन से खादी आंदोलन को अपूरणीय क्षति, गांधी संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि

विनोबा परंपरा के अग्रणी कर्मयोगी बालविजयजी के निधन से खादी आंदोलन को अपूरणीय क्षति, गांधी संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि

वर्धा, 19 मार्च। प्रख्यात गांधीवादी चिंतक, खादी सेवक और विनोबा परंपरा के अग्रणी कर्मयोगी आचार्य श्री बालविजयजी (100 वर्ष) के निधन पर देशभर की गांधीवादी संस्थाओं और प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। सर्वोदय आंदोलन...

वर्धा, 19 मार्च। प्रख्यात गांधीवादी चिंतक, खादी सेवक और विनोबा परंपरा के अग्रणी कर्मयोगी आचार्य श्री बालविजयजी (100 वर्ष) के निधन पर देशभर की गांधीवादी संस्थाओं और प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं।

सर्वोदय आंदोलन एवं खादी कार्य से जुड़े अशोक कुमार शरण ने कहा कि अखिल भारत चरखा संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान खादी जगत का राष्ट्रीय नेतृत्व करने वाले बालविजयजी के निधन से जो शून्य उत्पन्न हुआ है, उसकी भरपाई असंभव है। पूज्य विनोबा के आशीर्वाद से उन्होंने लगभग 45 वर्षों तक खादी मिशन के माध्यम से न केवल खादी संस्थाओं का मार्गदर्शन किया, बल्कि गांधी विचारनिष्ठ संस्थानों और कार्यक्रमों को भी अपने ओजस्वी चिंतन से दिशा दी।

उन्होंने बताया कि खादी, ग्रामोद्योग और गांधीजी के अन्य रचनात्मक विषयों पर उन्होंने देश के शीर्ष रचनात्मक कार्यकर्ताओं—सोमभाई, पंडित उदयचंद, नरेंद्र दुबे, जगपत दुबे, रामदास शर्मा, राधेश्याम शर्मा, व्ही. रामचंद्रन, पद्मश्री शैलेश बंद्योपाध्याय एवं रवीन्द्र उपाध्याय आदि—के साथ मिलकर नीतिगत स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य किया। योजना आयोग, भारत सरकार के मंत्रालयों और प्रधानमंत्री से संवाद कर खादी के पक्ष में नीतिगत पहलें सुनिश्चित कराईं, जिसके परिणामस्वरूप खादी विकास और ग्रामीण रोजगार के लिए सकारात्मक नीतियां बनीं। साथ ही, जब-जब खादी संस्थाओं के प्रतिकूल नीतियां बनाई गईं, उन्होंने उनका दृढ़ता से विरोध किया और संस्थाओं को आत्मनिर्भर, गैर-सरकारी स्वरूप में सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया।

बालविजयजी ने देशभर में यात्राओं के माध्यम से रचनात्मक कार्यकर्ताओं, युवाओं और संस्थाओं को जोड़ने और सशक्त बनाने का अद्भुत कार्य किया। युवाओं को जोड़ने की उनकी विशेष क्षमता थी। अशोक कुमार शरण ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कार्यकाल के दौरान उन्हें नागालैंड की एक खादी संस्था में जाने का अवसर मिला, जहां बालविजयजी ने अपनी यात्रा के दौरान पहुंचकर उस संस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया था।

उनके लिए पूरा भारत एक परिवार के समान था। भाषा, वेशभूषा, रहन-सहन या खान-पान के आधार पर उन्हें कभी कोई कठिनाई नहीं हुई। वे एक सच्चे संत की तरह जीवन जीते थे। कुछ समय के लिए उनका अज्ञातवास उनके शुभचिंतकों के लिए चिंता का विषय अवश्य बना, किंतु देशभर में उनके कुशल-क्षेम के लिए प्रार्थनाएं होती रहीं। उन्होंने राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और बिहार सहित अनेक क्षेत्रों में सक्रिय समय बिताया, जबकि महाराष्ट्र उनके कार्य का प्रमुख केंद्र रहा। जीवन के अंतिम वर्षों में वे पवनार आश्रम में रहे और अपने गुरु आचार्य विनोबा भावे द्वारा स्थापित परमधाम आश्रम (ब्रह्म विद्या मंदिर) में शतायु जीवन पूर्ण करते हुए अंतिम सांस ली।

खादी समिति, सर्व सेवा संघ सेवाग्राम (वर्धा), गांधी स्मारक निधि (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पट्टीकल्याणा) तथा जलेश्वर नाथ शरण फाउंडेशन (दिल्ली) सहित अनेक संस्थाओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के मंत्री एवं गांधी भवन न्यास के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि बालविजयजी के ब्रह्मलीन होने का समाचार हम सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक और अपूरणीय क्षति का क्षण है। वे गांधी विचार के अनन्य साधक, आचार्य विनोबा भावे के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, खादी जगत के समर्पित कर्मयोगी और विश्व शांति के अग्रदूत थे। उन्होंने अपने जीवन से “जय जगत” के संदेश को देश-विदेश तक पहुंचाया। हाल ही में उन्होंने अपने जीवन के 100 वर्ष पूर्ण किए थे, जो एक तपस्वी और प्रेरणादायी जीवन यात्रा का साक्ष्य है।

उन्होंने अपने व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1988 में, जब वे छात्र थे, “जय जगत यात्रा” के दौरान बालविजयजी उनके घर आए थे। उस समय भीषण गर्मी के बावजूद लोग घंटों तक उनके विचार सुनने के लिए एकत्रित रहे। उनके शब्दों में अद्भुत ऊर्जा और आत्मिक शक्ति थी। बाद में गांधी विचार परिषद में कार्य करते हुए गोपुरी में उनके पड़ोस में रहने और उनसे सत्संग का अवसर प्राप्त होना उनके जीवन के अमूल्य क्षण रहे।

उन्होंने कहा कि आज उनका न होना भीतर तक झकझोर देने वाला है। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक युग का अवसान है।

गांधी विचार से जुड़ी अन्य संस्थाओं सर्वोदय प्रेस सर्विस, गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, सर्वोदय शिक्षण समिति, विसर्जन आश्रम, कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट, खादी मिशन, खादी मिशन सेवा ट्रस्ट, मध्‍यप्रदेश आचार्यकुल सहित अनेक संगठनों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया है।

जुड़ें - हमारे व्हाट्सएप चैनल से

सप्रेस मीडिया - नवीनतम आलेख, रिपोर्ट, समाचार अपडेट सीधे अपने व्हाट्सएप पर प्राप्त करें।

व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें →

निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करें

आज के दौर में निष्पक्ष, स्वतंत्र और जन-सरोकार की पत्रकारिता को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। विज्ञापनदाताओं और कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त होकर आप तक सही और सटीक खबरें पहुंचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आपकी दी हुई छोटी-सी सहयोग राशि हमें सच्ची पत्रकारिता करते रहने का संबल देगी।

सहयोग राशि →

नवीन आलेख