8 वां अखिल भारतीय तिब्बत समर्थन समूह सम्मेलन संपन्न तिब्बती लोकतंत्र और आंदोलन पर चर्चा

धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश, 12 मार्च। यहां आयोजित 8वें अखिल भारतीय/अंतरराष्ट्रीय तिब्बत समर्थन समूह सम्मेलन (International Tibet Support Groups Conference) में 32 देशों के 120 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य निर्वासित तिब्बतियों का समर्थन करना, तिब्बत की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों, सांस्कृतिक संरक्षण और चीनी सरकार के खिलाफ एकजुटता के लिए एक वैश्विक रणनीति बनाना था।

धर्मशाला में आयोजित 8वें अखिल भारतीय तिब्बत समर्थन समूह सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने तिब्बती आंदोलन, लोकतंत्र और भारत के समर्थन पर विस्तार से चर्चा की। अपने प्रारंभिक वक्तव्य में आर.के. ख्रीमय ने सम्मेलन में मिले व्यापक समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धर्मशाला में परमपावन 14वें दलाई लामा के आशीर्वाद से प्रतिभागियों को नई प्रेरणा मिली है, जिसे संगठनों और क्षेत्रों में आगे बढ़ाना आवश्यक है।

सम्मेलन में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के सुरक्षा विभाग की मंत्री डोल्मा ग्यारी ने तिब्बती लोकतंत्र के विकास और भारतीय जनता के निरंतर समर्थन का उल्लेख किया। उन्होंने दलाई लामा के नेतृत्व को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में तिब्बती आंदोलन ने मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित की है।

CTA के सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती नेतृत्व की दो प्रमुख जिम्मेदारियां हैं—चीन-तिब्बत विवाद का समाधान और निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों का कल्याण। उन्होंने बताया कि भारत में 30 से अधिक स्थानों पर तिब्बती समुदाय बसे हैं, जिनमें कर्नाटक में सबसे अधिक बस्तियां हैं।

सम्मेलन में भारत और तिब्बत के बीच ऐतिहासिक संबंधों तथा मानवाधिकार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए तिब्बत मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए तिब्बत समर्थन समूहों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डॉ आनंद कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारत तिब्बत मैत्री संघ,सुरेंद्र कुमार,और बिहार के अध्यक्ष श्री हरेंद्र कुमार के संयोजन में बिहार के 20 साथियों ने सम्मेलन में भाग लेकर तिब्बत की संपूर्ण आजादी का समर्थन किया।

बिहार के अध्यक्ष श्री हरेंद्र कुमार ने कहा कि भारत की सीमा तिब्बत के साथ मिला हुआ है,चीन की विस्तार वादी नीतियों के कारण तिब्बत चीन के अनधिकृत कब्जे में है,जिससे भारत को अपनी सुरक्षा में काफी खर्च करना पड़ रहा है, जिससे उसका विकास बाधित हो रहा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत की आजादी में ही भारत की सुरक्षा निहित है, उन्होंने तिब्बत की आजादी के लिए भारत के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखने पर बल दिया।

इस अवसर पर पर किसान नेता ब्रजेश शर्मा, मनोज जी, बिहार सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चंद्र भूषण, भारत तिब्बत मैत्री संघ के प्रो अरुण कुमार सिंह, अभिषेक कुमार, शशि रंजन, श्याम विनय कुमार, विकास नारायण उपाध्याय ने भाग लेकर तिब्बत की आजादी का समर्थन किया।

सम्मेलन में 14 वें दलाई लामा की लंबी उम्र की कामना करते हुए इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि दलाई लामाजी के जीवन काल में ही तिब्बत की आजादी मिलनी तय है!

Table of Contents

नीले धुएँ की धरती : ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’

समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके

Read More »

पर्यावरण संरक्षण : केवल पौधारोपण नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास

Read More »

World Environment Day : पर्यावरण संरक्षण पर टिका है भविष्य

पर्यावरण संरक्षण और संतुलन का प्रश्न आज पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित

Read More »