गांधीवादी मूल्यों के प्रति समर्पित योद्धा थे रनसिंह परमार परमार

रनसिंह स्मृति सभा का आयोजन, एकता परिषद ने रूई से रूमाल, रूमाल से रोटी अभियान की शुरुआत की

भोपाल, 7 अप्रैल। प्रख्यात समाजसेवी और गांधीवादी विचारक डॉ. रन सिंह परमार की स्मृति में यहां आयोजित सभा में एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी.व्ही., मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस के मध्यप्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, गांधी भवन न्यास के सचिव अंकित मिश्रा, रनसिंह के पुत्र अनूप एवं अतुल और भाई शिवराज सिंह सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी विचारक, युवा और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर डॉ. परमार के जीवन, विचारों और उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया।

स्मृति सभा का आयोजन एकता परिषद, गांधी भवन न्यास, भोपाल और राष्ट्रीय युवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी.व्ही. ने डॉ. रन सिंह परमार को याद करते हुए कहा कि वे विभिन्न क्षमता रखने वाले एक व्यक्तित्व थे। वे एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, गांधी भवन ट्रस्ट भोपाल के न्यासी, राष्ट्रीय युवा योजना के सचिव तथा महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के सचिव के रूप में लगातार समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए कार्य करते रहे। विश्वास नहीं होता कि एक व्यक्ति इतना काम अकेले कर रहा था। रनसिंह खादी के प्रति बहुत समर्पित थे। उनकी याद में “रूई से रूमाल और रूमाल से रोटी” अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। हमारी कोशिश होगी कि हर बच्चे के हाथ में रूमाल हो। लाखों लोगों तक रूमाल पहुंचेगा, तो बुनकरों को रोजगार मिलेगा। फिर खादी का एक छोटा-सा रूमाल भी हजारों लोगों की आजीविका का साधन बन सकता है। इस अभियान की शुरुआत करते हुए स्मृति सभा में खादी के रूमाल को वितरित किया गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कांग्रेस की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एकता परिषद का इतिहास रहा है कि उसने दलित, कमजोर एवं वंचित के अधिकार के लिए काम किया। रन सिंह परमार एकता परिषद के एक बड़े स्तंभ थे। ग्वालियर से निकली पद यात्रा में आए लोगों का एक सपना था और रन सिंह जी उस सपने को हकीकत में बदलने की बीड़ा उठाने वाले में से एक थे।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रन सिंह जी को याद करते हुए कहा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा को जमीन पर उतारने के लिए रन सिंह ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी के विचारों को जन-जन तक ले जाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने का संकल्प हमें लेना चाहिए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव शैलेंद्र शैली ने सभा में कहा कि रन सिहं जी व्यक्तिगत जीवन को त्याग कर सामाजिक जीवन के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। सांप्रदायिकता के बढ़ते दौर में गांधीवादी मूल्यों के लिए जीने वाले व्यक्ति का नहीं होना हमारे लिए एक क्षति है। हम उन्हीं मूल्यों के साथ प्रतिबद्धता दिखाते हुए समाज के लिए काम करें।

पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा कि रन सिंह जी ने चंबल के वंचित समुदाय के साथ काम शुरू किया था, लेकिन वे बहुत जल्दी ही राष्ट्रीय स्तर पर काम करने लगे। वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने याद करते हुए कहा कि दुनिया को अगर हजार साल के लिए बेहतर करना है, तो लोगों को इंसान बनाना होगा और यह काम रनसिंह जी ने किया।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता जयंत तोमर ने गुरू रविन्द्रनाथ टैगोर की कविता को सुनाते हुए रन सिंह परमार को शांति के प्रति संकल्पित योद्धा बताया। चंबल में बागियों के आत्मसर्मपण के समय उनके दिए योगदाग को भी याद किया।

आयोजन में वरिष्ठ गायिका सुश्री सीमा बजाज ने ‘कवन ठगवा नगरिया लूटल हो‘, ‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’, ‘हो गई है भोर कब से’, ‘मत कर काया का अभिमान’ सहित कबीर के दर्जनों निर्गुन भजन प्रस्तुत किए। इसके बाद वरिष्ठ गायक सारंग फगरे ने ‘उड़ जाएगा हंस अकेला‘ सहित कबीर के कई लोकप्रिय निर्गुन भजनों की प्रस्तुति दी।

एकता परिषद के राज्य संयोजक दीपक अग्रवाल ने स्मृति सभा का संचालन करते हुए बताया कि रनसिंह जी अपने अंतिम समय से कुछ पहले तक सक्रिय थे और संगठन का काम कर रहे थे। स्मृति सभा में पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार, वरिष्ठ गांधीवादी अनुराधा शंकर, एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक रमेश शर्मा एवं अनीष कुमार, समर्थन के डॉ. योगेश कुमार, अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की सुश्री आशा मिश्रा, वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी मनोज कुलकर्णी, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. परशुराम तिवारी, सुश्री प्रतिभा, यतीश मेहता आदि शामिल हुए।

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