गांधी की प्रासंगिकता
गांधी के विचार आज के दौर में कितने कारगर हैं? उनका पालन करके क्या हम वापस पुराने समय में तो नहीं चले जाएंगे? गांधी की सीख को लेकर उठने वाले ये सवाल मौजूदा समय में सर्वाधिक प्रासंगिक और जरूरी हो…
महात्मा गांधी का कश्मीर
पांच अगस्त को धारा-370 के अनेक प्रावधानों के निलंबन के बाद देशभर में कश्मीर के इतिहास को लेकर बहस-मुबाहिसे जारी हैं। आजाद भारत में कुल जमा साढ़े पांच महीने ही सांस ले पाने वाले महात्मा गांधी को भी इसमें बख्शा…
हिंसक समाज में गांधी
गांधी के अहिंसक तौर-तरीकों से आजाद हुए हमारे देश में अब हिंसा व्यापक और गहरे रूपों में हर कहीं मौजूद है। अहिंसा को स्थापित करने में लगे कुछ लोगों को समाज ने हाशिए पर बैठा दिया है। ऐसे में विकास…
रिश्तों की मित्रता, मित्रता के रिश्ते
भारतीय संत परम्परा के आधुनिक चिंतकों में आचार्य विनोबा भावे का नाम शीर्षस्थ है। कई विषयों पर उनका चिंतन मौलिक और सबसे अलग हटकर है। मसलन-वे मानते हैं कि सभी रिश्तों में मित्रता सर्वोपरि है और आम मानवीय संबंधों को…
सचमुच वे गुमनाम नींव की ईंटें भी प्रणम्य हैं
किसी व्यक्ति की महानता उसके समय, परिवेश और परिजनों पर भी निर्भर करती है। महात्मा गांधी को भी अपने सबसे बड़े भाई से ऐसा साथ, सहयोग, सहायता मिलती रही। बुलन्द इमारत पर रीझना स्वाभाविक है, लेकिन नींव की वे ईंटें…
लोकसत्ता कहीं गहरा अन्याय कर बैठे तो सत्याग्रह ही रास्ता है
11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष आज साम्प्रदायिक विद्वेष और उससे उत्पन्न हिंसा देश की सर्वाधिक गंभीर समस्या है। मंदिर-मस्जिद विवाद या ऐसे अन्य मसलों से साम्प्रदायिकता पैदा नहीं होती बल्कि साम्प्रदायिक भावना के कारण ये मसले पैदा होते…
डॉ. जे. सी. कुमारप्पा: ग्रामीण भारत की आवाज
डॉ.कुमारप्पा अहिंसक अर्थव्यवस्था के जबरदस्त पैरोकार थे। गांधीजी के ग्रामोद्योग व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विचारों को उन्होंने सबसे अच्छे ढंग से संप्रेषित किया। आजादी बाद भी उन्होंने सरकार को इस दिशा में कार्य करने की सलाह दी थी। गांधी जी…






