पश्चिम बंगाल चुनाव ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा हालत को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। भारी सुरक्षा, प्रशासनिक हस्तक्षेप, भय और अविश्वास के माहौल ने यह सवाल तेज कर दिया…
संसद में ‘जादूगर’ जैसे हल्के-फुल्के शब्द पर मचा विवाद यह संकेत देता है कि भारतीय राजनीति से हास्य और सहजता तेजी से गायब हो रही है। संवाद की जगह कटुता और आक्रामकता ने ले ली है, जहां व्यंग्य भी असहजता…
भारतीय ज्ञान प्रणाली की दुहाई देने वाली सरकार के दौर में विश्वविद्यालयों में विद्वता, गरिमा और बौद्धिक स्वतंत्रता पर अभूतपूर्व संकट गहराता जा रहा है। बिलासपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ कुलपति के अशोभनीय व्यवहार से लेकर…
भारतीय मध्यवर्ग आज मिथ्या गौरव और भय के मिश्रण से गढ़े आंकड़ों के सहारे एक वैकल्पिक यथार्थ रच रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अर्थशास्त्रियों को अविश्वसनीय ठहराकर वह ऐसी चमकीली तस्वीर चाहता है जिसमें तेज़ विकास, बढ़ता ख़तरा और एक…
अब जब दुनिया-जहान को मथने वाले बिहार विधानसभा के चुनाव जीतकर ‘एनडीए’ की सरकार बन गई है, पूरी चुनावी प्रक्रिया के निहितार्थों पर बात की जानी चाहिए। मसलन,क्या चुनाव जीतने का पवित्र कार्य हो जाने के बाद नीतीश कुमार और…
सच्चिदानंद सिन्हा के निधन के साथ भारतीय समाजवादी चिंतन की एक ऐसी ज्योति बुझ गई है, जिसकी रोशनी पीढ़ियों को दिशा देती रही। मनिका के इस तपस्वी बुद्धिजीवी ने ज्ञान को साधना, गरीबी को संकल्प और लेखन को संघर्ष बनाया।…
लोकतंत्र की दुर्दशा से बेचैन भारतीय समाज एक ओर बिहार के चुनाव में बदलाव की उम्मीद देख रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका में उठे ‘नो किंग्स’ आंदोलन से प्रेरणा ले रहा है। जब सत्ता पूंजी के कब्जे में और…
गांधी, जेपी और लोहिया केवल अतीत के नाम नहीं, भविष्य की दिशा हैं। जब दुनिया हथियारों और बाजारों के जाल में उलझी है, तब उनके समाजवाद, आत्मनिर्भरता और नैतिक राजनीति के विचार फिर जीवित हो रहे हैं। यह समय उन्हें…
मौजूदा समय में विचार-शून्यता एक बड़े संकट की तरह स्थापित होती जा रही है। यहां तक कि हमारा लोकतंत्र देशी है या विदेशी जैसे आसन्न सवालों को भी अपेक्षित गंभीरता से हल नहीं किया जा रहा। क्या यह अपने समय…
अपने-अपने देश-काल के बरक्स हम अपने-अपने लोकतंत्र को चुनते, समझते और वापरते हैं, लेकिन क्या यह वही सर्व-जन-हिताय लोकतंत्र होता है जिसके भरोसे दुनिया के हम अधिकांश निवासी अपनी-अपनी वैतरणी पार करने के मंसूबे बांधते हैं? एक-दूसरे को नेस्तनाबूद करने…