राज्यसभा में सुधा मूर्ति की आवाज़ ने उस सच्चाई को उजागर कर दिया, जिसे समाज लंबे समय से टालता आ रहा था—डिजिटल दुनिया बच्चों के बचपन को निगल रही है। किडफ्लुएंसर संस्कृति की चमक के पीछे शोषण, दबाव, ट्रोलिंग और…
भोपाल में ‘गोलियों के सामने अडिग कलम’ पुस्तक का लोकार्पण भोपाल, 29 नवंबर । माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान परिसर में शुक्रवार को आंचलिक पत्रकारिता पर एक गंभीर विमर्श हुआ।इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार,लेखक और बायोपिक…
प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 9 नवंबर: विश्व उर्दू दिवस उर्दू… यह महज़ एक ज़ुबान नहीं, एक रूहानी धड़कन है — जिसमें मोहब्बत की महक है, अदब की नर्मी है, और इंसानियत की गर्माहट है। इस ज़ुबान के लफ़्ज़ होंठों से नहीं, दिल से निकलते हैं — जब कोई “जान-ए-मन” कहता है, तो उसकी आवाज़…
चंद्रकांत देवताले (जन्म 7 नवंबर 1936, निधन 14 अगस्त 2017) हिंदी कविता के उन कवियों में से थे, जिन्होंने जीवन की भूख, श्रम और पीड़ा को अलंकारों के बिना, सधे और सधे हुए शब्दों में कहा। उनकी कविता मनुष्य की…
इंदौर, 2 नवबंर। साहित्य, कला और संस्कृति के सबसे जीवंत और चमकदार उत्सव “इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल” का 11वां सीजन आगामी 14-15-16 नवंबर को होने जा रहा है। अपने स्तरीय आयोजनों से यह फेस्टिवल देश ही नहीं दुनिया भर में इंदौर…
कुमार अम्बुज की कविताएँ हमारे समय की बेचैनियों, विडंबनाओं और उम्मीदों की साक्षी हैं। हाल ही में कुसुमाग्रज सम्मान से सम्मानित अम्बुज ने अपने लेखन से यह सिद्ध किया है कि कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज के…
दीपावली केवल रोशनी और उत्सव का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक बंधन और मानवीय संवेदनाओं का पर्व है। यह त्योहार न केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, बल्कि समाज में सद्भाव, समानता और सहयोग की भावना को…
दिवाली रोशनी का नहीं, संवेदनाओं का भी त्योहार है — वह जो भीतर के अंधकार को मिटा सके। आज जब कृत्रिम उजालों में रिश्तों की ऊष्मा खोती जा रही है, जरूरत है कि हम अपने भीतर करुणा, प्रेम और अपनापन…
इंदौर, 4 अक्टूबर। हिंदी में कहानी का कलेवर आमतौर पर छोटा होता है और उपन्यास या लंबी कहानी की तरह उसमें एक से ज़्यादा मुद्दे उठाने की गुंजाइश नहीं होती। दिनेश भट्ट अपनी कहानी में यह जोख़िम उठाते है और…
बनारस घराने की ठुमरी परंपरा के जीवंत स्तंभ और पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्वर में ठुमरी, कजरी, चैती और दादरा का वह अद्वितीय संगम था जिसने शास्त्रीयता को लोकजीवन की…