कला और संस्‍कृति

दशहरे पर पूजनीय-शमी : विजय, परंपरा और पर्यावरण का अमर प्रतीक

दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि इतिहास, लोकजीवन और पर्यावरणीय महत्व को भी दर्शाती है। राजस्थान में खेजड़ी कहलाने वाला यह वृक्ष रेगिस्तान का राजा माना जाता है, जिसकी छाया, फलियां और…

हिन्दी दिवस : विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है हिन्दी

हिन्दी, जो संस्कृत से विकसित होकर देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, भारत की राजभाषा और विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह न केवल जनभाषा के रूप में लोगों को जोड़ती है बल्कि हमारी संस्कृति,…

हरियाली अमावस्या : कल्पवृक्ष पूजन मेला

हमारे देश में अलग-अलग पर्वों पर पीपल, बरगद, आंवला, शमी, इमली आदि वृक्षों की पूजा की जाती है, परन्तु राजस्थान के अजमेर के पास गांव मांगलियावास में सावन की हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्षों के जोड़े की पूजा की जाती है।…

वाद्य निर्माण : मिरज में मौजूद है, सितार को ‘जन्म’ देने की परंपरा

सितार समेत तरह-तरह के तार-वाद्यों के निर्माण के लिए विख्यात दक्षिण महाराष्ट्र का शहर मिरज भारतीय शास्त्रीय संगीत का केन्द्र भी है। सितार बनाने वाले शिकलगार, जिन्हें कई जगहों पर अपराधी माना जाता है, डेढ़ सौ साल पहले तक हथियार…

क्यों है, बोधगया के महाबोधि मंदिर पर विवाद?

फरवरी से बौद्ध समाज भगवान बुद्ध के निर्वाण-स्थल बोधगया के महाबोधि मंदिर के सामने धरने पर बैठे हैं। वजह है – प्रबंधन में ब्राम्हणवादी तौर-तरीकों का बढ़ता दबाव। इतिहास बताता है कि अपने समय में साक्षात गौतम बुद्ध और बाद…

इतिहास की खोई हुई समझ और समाज का भ्रमित रुख

करीब सवा तीन सौ साल पहले रुखसत हुए औरंगजेब की कब्र उखाड़ने से लगाकर बरसों पुराने गैर-हिन्दू उपासना-गृहों को खोदकर उन्हें हिन्दू साबित करने की मौजूदा हुलफुलाहट ने, एक समाज की हैसियत से हमें बेहद अज्ञानी और इतिहास-विमुख साबित कर…

Baisakhi 2025 : भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना का पर्व है बैसाखी

कृषि प्रधान भारत में बैसाखी न केवल फसल कटाई का उल्लास है, बल्कि सिख नववर्ष, सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक संघर्षों की गूंज भी है। पंजाब की धरती पर गूंजते ढोल-नगाड़ों और गिद्दा-भांगड़ा की थाप के साथ यह पर्व जहां समृद्धि…

‘सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी’ : एक बेहतरीन विरासत

सामंती समाज की लाख बुराइयों के बावजूद कतिपय राजे-महाराजे पढ़ने-लिखने के भारी शौकीन हुआ करते थे। कई रजवाडों की लाइब्रेरियां असंख्य बेशकीमती,अनूठी किताबों से भरी रहती थीं। आज की जोधपुर की ‘सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी’ इन्हीं में से एक है। अशोक…

फ़िल्म इन गलियों में: हाशिए की ज़मीन से उठता एक सिनेमाई प्रार्थना-गीत

नई फिल्म ‘इन गलियों में’ एक ऐसी कहानी है जो भारत की विविधता का प्रतिनिधित्व करती है। यह फिल्म अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े एक युवा जोड़े की प्रेम कहानी है। अवंतिका दसानी और विवान…

वरिष्ठ पत्रकार, कला समीक्षक शकील अख्‍तर ‘राष्ट्रीय अभिनव कला समीक्षक सम्मान’ से सम्‍मानित

सम्‍मान के बाद शकील अख़्तर ने कहा ‘कला समीक्षक से ज़्यादा प्रोत्साहक की भूमिका निभाई’ इंदौर, 29 मार्च। ‘रंगमंच के एक कलाकार के रूप में मैंने इंदौर से अपनी कला का सफ़र शुरू किया था। आज मुझे कला समीक्षक का…