इक्कीसवीं सदी के किसी भी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, स्थानीय, यहां तक कि मोहल्ले-पडौस के आपसी द्वंद्वों को देखें तो उनकी बुनियाद में भूमि के वितरण, विभाजन दिखाई देते हैं। ऐसे में साढ़े सात दशक पहले विनोबा भावे की अगुआई में हुए…
भारत डोगरा इस वर्ष 14 अप्रैल को चंबल घाटी में बागियों-डाकुओं के समर्पण के 54 वर्ष पूर्ण हुए। इस अवसर पर समर्पण करने वाले अनेक बागी यहां एकत्र हुए व उन्होंने अहिंसा व अमन-शांति की राह के लिए अपनी प्रतिबद्धता नए सिरे से दोहराई।…
नंदलाल बोस एक महान भारतीय चित्रकार थे, जिन्होंने आधुनिक भारतीय कला को नई दिशा दी। उनका जन्म 1882 में हुआ और उन्होंने शांति निकेतन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय संविधान की मूल प्रति को सजाने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त…
Quando si parla di casinò online in Italia, Queen Casino IT si distingue per la sua offerta ricca e variegata. Che tu sia un appassionato di slot machine, un amante del blackjack o un estimatore della roulette, questa piattaforma sa…
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार का विशेष सत्र बुलाना जहां एक ओर नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं इसके पीछे राजनीतिक रणनीति के सवाल भी उठ रहे हैं। परिसीमन, जनगणना और चुनावी…
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके व्यापक राष्ट्रवादी चिंतन को समझने का समय है। सामाजिक न्याय के पुरोधा अंबेडकर ने संविधान, अधिकारों की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि रखा। आज के विभाजित…
“यह रिवरफ्रंट विकास नदियों की हत्या है, नदियों को नालों में बदल देना है।” यह केवल एक तीखी टिप्पणी नहीं, बल्कि जल-संरक्षण के क्षेत्र में दशकों से काम कर रहे राजेंद्र सिंह की गहरी पीड़ा और चेतावनी है। वे मानते…
चंबल घाटी, जो कभी भय और हिंसा का प्रतीक थी, वहाँ संत विनोबा भावे और बाद में जयप्रकाश नारायण के प्रयासों से अहिंसा और परिवर्तन की ऐतिहासिक धारा प्रवाहित हुई। 1960 से शुरू हुआ बागियों का आत्मसमर्पण आंदोलन 1972 में…
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और राममनोहर लोहिया भारतीय सामाजिक-राजनीतिक चिंतन के दो ऐसे महान स्तंभ रहे हैं, जिनकी वैचारिकी में अनेक समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों ने सामाजिक न्याय, समानता और आर्थिक विषमता के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके बीच संवाद…
14 अप्रैल को मनाया जाने वाला समर्पण दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब चंबल के बागियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण किया। यह घटना केवल कानून व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि मानव हृदय परिवर्तन की…