संकट के मुहाने पर खड़ी पृथ्वी
22 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व पृथ्वी दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर देता है। विकास और उपभोग की अंधी दौड़ के बीच पृथ्वी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है—जलवायु परिवर्तन, जल संकट, प्रदूषण और घटती जैव विविधता इसके स्पष्ट…
डॉ. अम्बेडकर और लोहिया एक ही धारा को आगे बढ़ाने वाले विचारक
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और राममनोहर लोहिया भारतीय सामाजिक-राजनीतिक चिंतन के दो ऐसे महान स्तंभ रहे हैं, जिनकी वैचारिकी में अनेक समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों ने सामाजिक न्याय, समानता और आर्थिक विषमता के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके बीच संवाद…
दुनिया कौन चला रहा है?
आज की दुनिया में जिस असीमत उपभोग पर टिकी जीवन-दृष्टि का सम्राज्य कायम है, उसमें हिंसक युद्ध, जहरीला भेदभाव और गैर-बराबरी मामूली पड़ाव भर हैं। खाड़ी देशों, खासकर ईरान के खिलाफ अमरीकी-इजरायली हवस के चलते फांदे गए भीषण युद्ध, अमानवीय,…
गांधी जयंती : महात्मा गांधी महज़ सिद्धांत नहीं सरल व्यवहार है
2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। सत्य और अहिंसा को जीवन का आधार मानते हुए उन्होंने भयमुक्त और श्रमशील जीवन का संदेश दिया। सादगी, स्वावलम्बन और…
मिट्टी की महिमा के अमर गायक : कवि डॉ.शिवमंगल सिंह सुमन
हिंदी साहित्य की प्रगतिशील विचारधारा के शीर्षस्थ कवि डॉ.शिवमंगल सिंह सुमन के अवसान को दो दशक हो रहे हैं। महाकाल के महिमामय उद्यान के प्रमुख सुमन की सुरभि से कभी उज्जैनी का कण-कण सुवासित होता था। शहर का कोई भी…




