करीब डेढ़ दशक बाद होने जा रही ‘जनगणना 2027’ में जातियों की बहुप्रचारित मर्दुमशुमारी के अलावा उन असंख्य प्रवासी-मजदूरों का भी महत्व होना चाहिए जो हमारे ‘जीडीपी’ को अनजाने में आसमान तक पहुंचाने में लगे हैं। आखिर किसी भी योजना…
भोपाल, 23 अप्रैल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ही एमबीबीएस डिग्री का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग स्थानों देवास और बालाघाट में दो व्यक्ति डॉक्टर के रूप…
भारत में पंचायती राज व्यवस्था लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे 73वें संविधान संशोधन के जरिए संवैधानिक दर्जा मिला। वैदिक काल से चली आ रही स्थानीय स्वशासन की परंपरा को आधुनिक स्वरूप देते हुए…
भारत में 73वें संविधान संशोधन के जरिए मजबूत की गई पंचायत राज व्यवस्था का उद्देश्य ग्राम स्तर पर लोकतंत्र, विकास और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना था। लेकिन 33 वर्षों बाद भी यह व्यवस्था अपनी मूल भावना से भटकती दिख…
नब्बे के दशक की शुरुआत में आए भू-मंडलीकरण के बाद की सभी रंगों-झंडों की सरकारों की सबसे बड़ी चिंता रही है – कृषि में लगी ग्रामीण आबादी के ‘सरप्लस’ को किस तरह उद्योगों यानि शहरों की तरफ हकाला जाए। विडंबना…
किसानों और नर्मदा बचाओ आंदोलन के संघर्ष बाद सरकार ने बदला मुआवजा फॉर्मूला भोपाल, 22 अप्रैल। आज मध्य प्रदेश सरकार ने कैबिनेट में फैसला लिया है कि भू-अर्जन कानून 2013 के तहत दिए जाने वाले मुआवजे में गुणांक (मल्टीफिकेशन फैक्टर)…
22 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व पृथ्वी दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर देता है। विकास और उपभोग की अंधी दौड़ के बीच पृथ्वी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है—जलवायु परिवर्तन, जल संकट, प्रदूषण और घटती जैव विविधता इसके स्पष्ट…
अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुके हैं। स्वतः संज्ञान याचिका के तहत यह मुद्दा उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, जहां 100 मीटर ऊंचाई के आधार पर क्षेत्र सीमित करने पर विवाद…
नर्ईदिल्ली, 21 अप्रैल। स्वास्थ्य अधिकार मंच पिछले 15 वर्षों से भारत में अनैतिक क्लिनिकल ट्रायल के मुद्दे को लगातार उठाता रहा है। वर्ष 2012 में इसे लेकर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें देश में…