एक ही एमबीबीएस डिग्री से दो डॉक्टर ! देवास–बालाघाट मामले ने खोली स्वास्थ्य तंत्र की पोल

भोपाल, 23 अप्रैल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ही एमबीबीएस डिग्री का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग स्थानों देवास और बालाघाट में दो व्यक्ति डॉक्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं। इनमें से एक के पास वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी नहीं पाया गया, बावजूद इसके वह सरकारी पद पर कार्यरत है।

रिपोर्ट के अनुसार, बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में पदस्थ बीएमओ डॉ. सुनील कुमार और देवास जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. सुनील कुमार के दस्तावेजों में कई समानताएं और असंगतियां सामने आई हैं। दोनों के पिता का नाम, जन्मतिथि, डिग्री वर्ष और कॉलेज तक समान बताए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले में फर्जीवाड़े की आशंका गहरा गई है।

प्रारंभिक जानकारी से यह संकेत मिलता है कि नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में गंभीर लापरवाही हुई है या जानबूझकर अनदेखी की गई। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

इस मामले को लेकर जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और राज्य के स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि अमूल्य निधि ने कहा कि बिना वैध योग्यता के चिकित्सा सेवा देना गंभीर अपराध है और यह आम नागरिकों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश के अमूल्य निधि, सुधा तिवारी, राजकुमार सिन्हा, डॉ. जी डी वर्मा,  राहुल यादव की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मध्य प्रदेश ने सरकार से मांगें की है इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय, समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच (अधिमानतः एसआईटी/तृतीय-पक्ष जांच) कराई जाए। दोषी व्यक्तियों के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में शामिल संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। राज्य में कार्यरत सभी डॉक्टरों (सरकारी एवं निजी) के डिग्री, पंजीकरण एवं पहचान का व्यापक ऑडिट/सत्यापन अभियान चलाया जाए।

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश ने कहा है कि मेडिकल रजिस्ट्रेशन, नियुक्ति और पदस्थापना प्रक्रिया में आधार-आधारित डिजिटल वेरिफिकेशन एवं रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम हेतु नियमित थर्ड-पार्टी ऑडिट एवं सोशल अकाउंटेबिलिटी मैकेनिज्म विकसित किया जाए। मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु शिकायत निवारण तंत्र  को सशक्त और सुलभ बनाया जाए।

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