Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

विचार

लक्षद्वीप : ‘स्वर्ग’ पर संकट थोपने की योजनाएं

प्रकृति के अद्भुद सुंदर इलाकों को पर्यटन के नाम पर उजाडने का हमारा विकास-वादी चलन अब सुदूर लक्षद्वीप में पांव पसार र‍हा है। आदिवासी बहुल शांत और समझदार लोगों की कुछ हजार की बसाहट अब विकास-वादियों की आंख में खटकने…

महामारी में मजूरी : बच्चों की मजबूरी

‘अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस’ (12 जून) समाज के विभिन्न तबकों की तरह बच्चों पर भी कोविड-19 का मारक प्रभाव पडा है। कई जगहों पर लॉकडाउन और उसके बाद बच्चों को अपने परिवारों के भरण-पोषण में हाथ बंटाना पड रहा है।…

‘राष्ट्र के नाम’ संदेश बनाम ‘राष्ट्र का’ संदेश

नायक कई मर्तबा यह समझने की ग़लती कर बैठते हैं कि जनता तो उन्हें खूब चाहती है, सिर्फ़ मुट्ठी भर लोग ही उनके ख़िलाफ़ षड्यंत्र में लगे रहते हैं यानी शासक के हरेक फ़ैसले में सिर्फ़ नुस्ख ही तलाशते रहते…

सोशल मीडिया – कल हो, न भी हो ?

भारत में जिस तरह का सरकार-नियंत्रित ‘नव-बाज़ारवाद’ आकार ले रहा है उसमें यह नामुमकिन नहीं कि सूचना के प्रसारण और उसकी प्राप्ति के सूत्र बाज़ार और सत्ता के संयुक्त नियंत्रण (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) में चले जाएँ और आम जनता को उसका…

Opinion : खेल के साथ खेल करने का अपराध

सुशील कुमार ने अपनी सफलता को मनमानी का लाइसेंस समझ लिया। खेल के सारे व्यापारियों ने उसकी इस समझ को सुलझाया नहीं, भटकाया-बढ़ाया। अब हम देख रहे हैं कि सुशील कुमार पर हत्या का ही आरोप नहीं है बल्कि असामाजिक-अपराधियों…

कानून की कमी से बच रहे, ‘प्राणवायु’ के जमाखोर

बुनियादी बातों की अनदेखी का एक और कारनामा हाल में कोविड-19 की चपेट में आए मरीजों और उनके तीमारदारों ने भोगा है। ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन और अन्य बेहद जरूरी दवाओं की कालाबाजारी के चलते ये चीजें जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच…

इजराइल – फिलिस्तीन : तेल की खातिर तनाव

इस महीने की शुरुआत में इजराइल और फिलिस्तीन के उग्रवादी समूह ‘हमास’ के बीच एक बार फिर भडके ग्यारह दिन के युद्ध में हालांकि फिलहाल ‘युद्ध-विराम’ हो गया है, लेकिन क्या यह ‘युद्ध-विराम’ कभी स्थायी हो सकेगा? क्या पश्चिम के…

प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का टूटता तिलिस्म !

कहा जा रहा है कि मरने वालों के आँकड़े जैसे-जैसे बढ़ रहे हैं, नदियों के तटों पर बिखरी हुई लाशों के बड़े-बड़े चित्र दुनिया भर में प्रसारित हो रहे हैं, प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ भी उतनी ही तेज़ी से…

कोरोना का कहर झेलते आदिवासी

पिछले कुछ दिनों से कोविड-19 की दूसरी लहर के हल्की पडने की खबरें आ रही हैं और तमाम सरकारी, गैर-सरकारी लवाजमा अब तीसरी लहर की तैयारी में जुट गया है, लेकिन क्या हमारे सुदूर गांव-देहातों और आदिवासी इलाकों में भी…

नागरिकों को अब किस तरह की लहर से लड़ाई के लिए तैयारी करना चाहिए ?

जिन लहरों से हम अब मुख़ातिब होने वाले हैं उनका ‘पीक’ कभी भी शायद इसलिए नहीं आएगा कि वह नागरिक को नागरिक के ख़िलाफ़ खड़ा करने वाली साबित हो सकती है। जो नागरिक अभी व्यवस्था के ख़िलाफ़ खड़ा है वही…