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नर्मदा आंदोलन की सहयोगी कृष्णा रावल का निधन, संघर्षों की साथी को अंतिम विदाई

इंदौर, 19 मई। मध्य प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री, समाजवादी नेता ओमप्रकाश रावल की धर्मपत्नी एवं नर्मदा बचाओ आंदोलन की वरिष्ठ सहयोगी कृष्णा रावल (90 वर्ष) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर से सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों,…

पानी को जनआंदोलन बनाना होगा, तभी किसान समृद्ध और भारत जल सुरक्षित बनेगा

नागपुर जल संवाद-2026 में पद्म भूषण अनिल प्रकाश जोशी, नितिन गडकरी और नाना पाटेकर ने रखा जल, समाज और भविष्य का विजन नागपुर 18 मई। विदर्भ को किसान आत्महत्या मुक्त बनाने, जल संकट के स्थायी समाधान खोजने और जल संरक्षण…

प्रकृति का मौन विलाप : विलुप्त होती प्रजातियों की पुकार

धरती पर जीवन का ताना-बाना करोड़ों प्रजातियों से बुना गया है, लेकिन मानव सभ्यता की तेज़ रफ्तार ने इस संतुलन को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। आज विलुप्ति की रफ्तार प्राकृतिक दर से हजार गुना अधिक मानी जा रही…

सत्ता की बेड़ियाँ और सिसकती आस्था : पंचेन लामा की गुमशुदगी के तीन दशक

इतिहास में कुछ गुमशुदगियाँ केवल व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरी सभ्यताओं की पीड़ा बन जाती हैं। गेडुन चोएकी न्यिमा की कहानी भी ऐसी ही एक जीवित त्रासदी है, जहाँ छह वर्ष का एक मासूम बालक अपनी आध्यात्मिक पहचान की कीमत…

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नर्मदा की लड़ाई का एक प्रतिबद्ध स्वर शांत हुआ : वरिष्ठ साथी रमेश बिल्लौरे नहीं रहे

इंदौर, 10 मई। नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ लेखक, शोधकर्ता और पर्यावरण चिंतक रमेश बिल्लौरे का रविवार दोपहर इंदौर में निधन हो गया। मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों ने उन्हें नर्मदा संघर्ष का “चलता-फिरता दस्तावेज”, “घुमक्कड़ बुद्धिजीवी” और “नर्मदा का…

संविधान का सम्मान और जनसहभागिता से ही नदियों-पहाड़ों की रक्षा

नदी और पहाड़ केवल प्रकृति के प्रतीक नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जीवन के आधार हैं। जब नदियाँ बीमार होती हैं और पहाड़ घायल होते हैं, तब समाज का संतुलन भी डगमगाने लगता है। आज जलवायु संकट, अंधाधुंध खनन और…

वैश्विक पर्यावरण : पर्यावरण संकट की चुनौती

एक जमाने में दूर की कौड़ी लगने वाला पर्यावरण प्रदूषण आज एन हमारी देहरी पर आन खड़ा हुआ है। यह इतनी तेजी और प्रभाव के साथ हुआ है कि अब समूची मानव जाति का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया…

अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता में छह महिलाएं और दो पुरुष कहानीकारों की कहानियां पुरस्कृत

अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता में महिलाओं का बड़ा दबदबा नई दिल्ली। पिछले दिनों 2 मई को विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान द्वारा पिछले तीन साल से आयोजित अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता न सिर्फ हिंदी कहानी विधा में परिवर्तन ला रही…

कलम की आजादी पर कसता शिकंजा

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत का 157वें स्थान…