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कोरोना संकट में समझें बदलाव की जरूरत

कोरोना की महामारी ने गरीब देशों की शर्मनाक गैर-बराबरी, हिंसा और संसाधन-हीनता को उजागर कर दिया है। अब सवाल उठने लगे हैं कि पहले से बदहाल लोगों को कोरोना सरीखे संकट से कैसे बचाया जा सकता है? और क्‍या ऐसी…

अंधविश्‍वास की बजाए अक्‍ल से जीतें, कोरोना का मोर्चा

कई तरह की अच्‍छाई-बुराई, समझ-नासमझी और विश्‍वास-अंधविश्‍वास महामारी के दौर में और भी तीखे रूप में उभर कर सामने आ जाते हैं, लेकिन क्‍या बुराई, नासमझी और अंधविश्‍वास के सहारे संकट पर काबू पाया जा सकता है? कोरोना वायरस के…

कोरोना प्रभावित श्रमिकों की सुध लीजिए

कोरोना यानि ‘कोविड-19’ ने देश की कामकाजी आबादी को सर्वाधिक संकट में डाल दिया है। संक्रमण के डर और बिना उत्‍पादन के बैठे-बिठाए रखने-खिलाने की जिम्‍मेदारी ने छोटे और मझौले उद्योगों को मजदूरों से मुंह फेरने के लिए मजबूर कर…

कोरोना पीडितों के लिए कितने तैयार हैं, हमारे स्‍कूल?

मौजूदा महामारी से घबराकर अपने-अपने गांवों-घरों की ओर लौटते लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे रास्‍ते के स्‍कूलों में ‘लॉक डाउन’ के चलते कुछ दिन रुक जाएं। यह आग्रह उनसे भी किया जा रहा है जो शहरों,…

कोरोना के समय में क्‍या करें

‘कोविड-19’ के संसार-व्‍यापी संकट से निपटना कोई ‘रॉकेट साइंस’ नहीं है। कुछ सावधानियां बरतकर इससे आसानी से निपटा जा सकता है। सवाल है कि क्‍या हम अपनी आम, रोजमर्रा की मामूली आदतों को बदलने के लिए तैयार हैं? खासकर तब,…

‘कोविड’ की त्रासदी और विकेन्द्रित अर्थव्‍यवस्‍था

पिछले साल दिसम्‍बर में चीन से निकला वायरस ‘कोविड-19’ दुनियाभर को हलाकान किए है। अब तक उससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों ने अपनी जानें दी हैं। क्‍या इस तबाही का कोई जोड हमारी अर्थव्‍यवस्‍था से भी है?…

मध्यप्रदेश में जलाधिकार कानून: कितना सार्थक

मध्यप्रदेश की मौजूदा सरकार ने अपने घोषणा-पत्र के मुताबिक ‘मध्यप्रदेश जल का अधिकार (संरक्षण और निरंतर उपयोग) अधिनियम-2020’ क्रियान्वित करने का तय किया है, लेकिन क्या यह कानून राज्य के आम लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करने में…

आज भी बरकरार हैं, देवताओं के ‘पवित्र-वन’

वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण-संवर्धन में लगी कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ के हल्ले में हम अपनी उन परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं जिनकी बदौलत हमारे पास आज भी वन और वन्यप्राणी सम्पदा बची हुई है। भारी-भरकम किताबी ज्ञान की टक्कर…

अपराधियों से कैसे बचेगा लोकतंत्र?

एक-के-बाद-एक राज्य में होती राजनीतिक धमाचैकड़ी क्या चुनाव सुधार की आसन्न जरूरत नहीं बता रही? आजकल मध्यप्रदेश में जारी सत्ता का सर्कस क्या चुनाव सुधारों से काबू में किया जा सकता है भारतीय राजनीति में अपराधी तत्वों की बढ़ती जा…

विचारों में बहस की परंपरा

आज के दौर में, जब एक ही विचार, नेतृत्व और उनकी अगुआई में एक ही राजनीतिक जमात का बोलबाला हो, यह जानना सुखद है कि हमारी परंपरा में विपरीत विचारों के बीच वाद-विवाद, सहमति-असहमति की खासी हैसियत रही है। इन…