Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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प्रभु जोशी के बिछुड़ने से प्रसारण, साहित्य और संस्कृति की दुनिया को एक और भीषण क्षति

प्रभु जोशी / श्रध्‍दा सुमन इस कठिन समय में एक के बाद एक महत्वपूर्ण करीबी व्यक्तित्व हमसे बिछुड़ रहे है। यह हमारे समय का सबसे भीषणतम दौर है…। प्रभु जोशी जी का जाना हमारे लिए अपूरणीय व्यक्तिगत पारिवारिक क्षति है।…

कोराना काल में प्राणवायु के लिए पेड़

कोविड-19 महामारी के इस दौर में जिस अदृश्‍य, अ-स्पर्शनीय, गंधहीन और केवल महसूस की जाने वाली प्राणवायु यानि ऑक्सीजन की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, वह अपने आसपास की वनस्पतियों, पेडों में भरपूर मौजूद है। लेकिन क्या…

अखिल गोगोई की जीत से असम में नई राजनीति का दौर

अखिल गोगोई असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी पहचान बड़े बांधों का विरोध करने वाले, जैव विविधता को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले, जैव विविधता पार्क बनाने वाले…

तप, त्‍याग और सेवा की संगम थी – सुमन ताई बंग

96 वर्षीय गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री सुमनताई का निधन सेवाग्राम, 3 मई । गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री सुमनताई का आज 3 मई 21 (सोमवार) को कस्तूरबा अस्पताल में निधन हो गया। वे 96 वर्ष…

कोराना काल : पूंजीवाद में कोराना

कोविड-19 के इस मारक दौर में दवाओं, अस्पतालों, प्राणवायु और उसके सिलिन्डरों की भारी कमी है और उनकी कालाबाजारी तक हो रही है। क्या इसका बाजार की हमारी उस मौजूदा व्यवस्था से भी कुछ लेना-देना है जिसने नब्बे के दशक…

वायरस से बचने के लिए जैव-विविधता

कोरोना वायरस की भीषण चपेट में फंसी दुनिया को आखिर इससे किस तरह निजात मिल सकेगी? साफ दिखाई देता है कि इस तरह के अनेक संकटों से बचने के लिए हमें ‘कोरोना बाद’ की ऐसी बदली हुई दुनिया के बारे…

जनादेश ममता के पक्ष में नहीं, प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ है

दुनिया भर की नज़रें यह देखने के लिए अब भारत पर और ज़्यादा टिक जाएँगी कि अपने जीवन में किसी भी तरह की पराजय स्वीकार नहीं करने वाले नरेंद्र मोदी बंगाल के सदमे को किस अन्दाज़ में प्रदर्शित करते हैं…

प्रधानमंत्री के अंदर भी झांकने की जरूरत है !

देश और दुनिया की बदलती हुई परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अब ज़रूरी हो गया है कि वे अपने नायकों की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से अलग उनके/उनमें मानवीय गुणों और संवेदनाओं की तलाश भी करें। ऐसा इसलिए कि अब जो निश्चित…

श्रमिकों का सम्‍मान और सबके लिए एक न्यायपूर्ण भविष्य के निर्माण का वादा

1 मई / अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस कोविड-19 के दौर और एक मई का दिन यानी मजदूर दिवस, हमें इस बात का आईना दिखाता है कि कोविड महामारी के दौर में सबसे ज्यादा अन्याय जिसने सहा वह है हमारा मजदूर वर्ग।…

कोरोना-काल में कैसी हो शिक्षा?

आपदा के किसी भी दौर में सबसे पहला शिकार बच्चे और उनकी शिक्षा ही होते हैं। कोविड-19 के पिछले साल-सवा साल में भी बच्चों को अचानक पकडा दिए गए मोबाइल या कम्प्यूटर की मार्फत पढाया-लिखाया जा रहा है। क्या भौतिक…