हिन्दू परम्परा में श्राद्ध-पक्ष पूर्वजों को याद करने की खातिर मनाया जाता है, लेकिन क्या हम कभी अपने आसपास की प्रकृति के पूर्वजों का भी स्मरण कर पाते हैं? रोटी, कपडा और मकान की बुनियादी जरूरतों के लिए परम्परा से…
अपनी राजनीति, बाजार-हितैषी चरित्र और नस्ली पूर्वाग्रहों के बावजूद नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति कभी-कभार कमाल कर देती है। इस बार उसने यह कारनामा ईरान की जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के नोबेल के लिए चुनकर…
सार्वजनिक स्वास्थ्य विद्वान प्रोफेसर डॉ. इमराना कदीर ने व्यक्त किये उद्गार भोपाल, 2 अक्टूबर 2023। आज की नीतियाँ स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं। सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के स्थान पर कवरेज पर ध्यान केन्द्रित कर…
महात्मा गांधी ने अपने विचारों के क्रियान्वयन के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण किया था। 48 में, उनके जाने के बाद सभी को मिलाकर दो प्रमुख संस्थाएं बनाई गईं, परन्तु आज इन संस्थाओं के क्या हाल हैं? क्या आज भी…
2 अक्टूबर : गांधी जयंती पिछले महीने गांधी-विचार के एक और महत्वपूर्ण केन्द्र, वाराणसी के ‘राजघाट’ को सरकार की शह पर नेस्त-नाबूद कर दिया गया है। ऐसे समय में जब देश-दुनिया को गांधी-विचार की सर्वाधिक जरूरत थी, इस केन्द्र का…
2 अक्टूबर : गांधी जयंती पर विशेष महिला-आरक्षण की मौजूदा बहसा-बहसी के बीचम-बीच अरविन्द मोहन की ‘गांधी की महिला फौज’ किताब हमें एक ऐसे नायाब अनुभव से रू-ब-रू करवाती है जिसमें बिना किसी तामझाम के गांधी ने अपनी पलटन में…
गांधी जयंती की पूर्व बेला पर वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का व्याख्यान इंदौर, 1 अक्टूबर। हम महसूस ही नहीं कर पा रहे है कि समाज बेसुध क्यों हो रहा है? इसकी जुबान क्यों लडखड़ा रही है। इस दौर में देश-…
अब तक जीवन-पद्धति से उपजी मानी जाने वाली बीमारी डायबिटीज या मधुमेह अब छोटे बच्चों में भी अपने पैर पसारने लगी है। जाहिर है, यह परिस्थिति सरकार, समाज और परिवार, सभी के सरोकार की है। अपने पास-पडौस के किसी बच्चे…
24 सितम्बर 1969 को शुरु हुई ‘राष्ट्रीय सेवा योजना’ National Service Scheme (एनएसएस) राष्ट्र की युवाशक्ति के व्यक्तित्व विकास हेतु एक सक्रिय कार्यक्रम है जिसने अपने आधी सदी से अधिक के जीवन में अनेक उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की हैं। प्रस्तुत…
आजादी के पचहत्तार साल में वन अधिकार पर अब जाकर कुछ बातें हो रही हैं और परंपरागत वनवासियों को कहीं-कहीं पट्टे दिए भी जा रहे हैं, लेकिन कुछ आदिवासी इलाके ऐसे हैं जहां जंगल को बचाने का विवेक और तकनीक…