सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के बजाय नीतियाँ स्वास्थ्य क्षेत्र में निजीकरण को दे रही बढ़ावा

सार्वजनिक स्वास्थ्य विद्वान प्रोफेसर डॉ. इमराना कदीर ने व्‍यक्‍त किये उद्गार  

भोपाल, 2 अक्टूबर 2023। आज की नीतियाँ स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं। सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के स्थान पर कवरेज पर ध्यान केन्द्रित कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन भी मुश्किल में है और सरकार लगातार इसका बजट आवंटन कम कर रही है।

ये उद्गार सार्वजनिक स्वास्थ्य विद्वान और सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ (जेएनयू) में प्रोफेसर डॉ. इमराना कदीर ने व्‍यक्‍त किये। वे आज जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश और ‘ हम सब’ के संयुक्‍त तत्‍वावधान में आयोजित व्‍याख्‍यान में ‘स्वास्थ्य : चुनौतियाँ और भविष्य’ विषय पर मंजरी लाइब्रेरी, सेवन हिल्स स्कूल, भोपाल में बोल रही थी। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता भोपाल मेमोरियल हास्पिटल एडं रिसर्च सेंटर की प्रभारी डायरेक्‍टर डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने की।

प्रोफेसर (डॉ.) इमराना कदीर एवं डायरेक्‍टर डॉ. मनीषा श्रीवास्‍तव

प्रोफेसर (डॉ.) इमराना कदीर ने अपने वक्तव्य में ज़ोर देते हुए कहा कि आजादी के वक्‍त देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को प्राथमिक मूलभूत स्वास्थ्य देने की सोच थी। भारत में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए भोरे समिति से लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बिल 2009, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों बनाई गई।

उन्होंने तमाम नीतियों और योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश में संरचनात्मक समायोजन नीति (Structural Adjustment Policy) के नाम पर 1990 के दशक में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे निजीकरण का दायरा बढ़ते हुए आज 70 प्रतिशत स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ निजी क्षेत्र पर निर्भर हो गई हैं। वहीं अस्‍पतालों में बिस्तरों की संख्या महज 40 प्रतिशत तक सीमित है। जबकि इस नीति के तहत लोगों को बुनियादी सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के साथ – साथ रोजी रोटी और मकान भी नहीं दे पाये हैं।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही भोपाल मेमोरियल हास्पिटल एडं रिसर्च सेंटर की प्रभारी डायरेक्‍टर डॉ. मनीषा श्रीवास्‍तव ने कहा कि हमारी नीतियाँ सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही है। डॉक्टर योजनाओं में उचित इलाज करने में सहयोग देते हैं परंतु आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए है। प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ, रेफरल और मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए आज कुछ विशेष नहीं है। एनएफएचएस का डाटा ये बता रहा है कि एनीमिया बढ़ रहा है और कुपोषण के आंकड़े चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र के जमीनी स्तर के अनुभवों का दस्‍तावेजीकरण करना चाहिए और एक समग्र दस्‍तावेज बनाया जाना चाहिए जिससे स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र के नीति निर्माता इससे सीख ले पाए। क्या हम देखभाल और कवरेज के मुद्दे तथा देखभाल के खर्च को कैसे कम करें, इस मुद्दे पर सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए जन स्वास्थ्य अभियान मध्‍यप्रदेश के अमूल्य निधि ने मुख्य वक्ता डॉ. इमराना कदीर और भोपाल गैस पीड़ित संघ की रईसा बी, मोहिनी देवी ने कार्यक्रम की अध्यक्षा प्रभारी डायरेक्‍टर डॉ. मनीषा श्रीवास्तव का सूतमाला से स्वागत किया। ‘हम सब’ से जुडे वरिष्‍ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्‍ता राकेश दीवान, मध्‍यप्रदेश विज्ञान सभा के एस. आर. आजाद ने वक्ताओं का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन एस. आर. आजाद ने किया और आभार रघुराज सिंह ने माना।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, सार्व‍जनिक स्‍वास्‍थ्‍य के विद्यार्थी, पत्रकार और विभिन संस्थाओं और संगठन के प्रतिनिधि बड़ी संख्‍या में शामिल हुए।

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