इंदिरा की नज़रों में जेपी की हैसियत आम आदमी जितनी ही थी ?
लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) : 11 अक्टूबर जन्मदिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) का आज (ग्यारह अक्टूबर) जन्मदिन है। तीन दिन पहले आठ अक्टूबर को उनकी पुण्य तिथि थी। सोचा जा सकता है कि जेपी आज अगर हमारे बीच होते तो…
क्या दलीय लोकतंत्र से आगे कोई रास्ता नहीं है?
जयप्रकाश नारायण क्या वर्तमान दलीय लोकतंत्र का कोई विकल्प हो सकता है? और यदि हो सकता है तो उसका स्वरूप कैसा होगा? इस सिलसिले में प्रस्तुत है, ‘सप्रेस’ के भंडार में से देश के मूर्धन्य नेता, स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी स्व. श्री…
उत्तराखंड नागरिक समाज द्वारा प्रदेश में साम्प्रदायिक तत्वों पर लगाम लगाने की अपील
देहरादून। उत्तराखंड में कुछ तत्वों द्वारा माहौल को जो साम्प्रदायिक रंग देकर सामाजिक समरसता और सद्भाव बिगाड़ी जा रही है उसको लेकर उत्तराखंड के आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पत्रकारों, वकीलों, पूर्व सरकारी अधिकारियों, राजनैतिक दलों के…
सोनम वांगचुक के सत्याग्रह को मिला गांधीवादी संस्थाओं का समर्थन, लद्दाख के संरक्षण की अपील
नईदिल्ली, 8 अक्टूबर । सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का…
नक्सलवाद : हिंसा का जवाब हिंसा नहीं, क्या हो असली समाधान?
छत्तीसगढ की लाचारी, बेकारी और बीमारी नक्सलवाद को जन्म दे रही है। नक्सलवाद और बागीपन हिंसा है, लेकिन हिंसा को हिंसा से ठीक कभी नहीं किया जा सकता। हिंसा को स्नेह से सम्मान देकर बदला जा सकता है; इसलिए राज-समाज…
Sonam Wangchuk : लद्दाख से उठी हिमालय की आवाज
महात्मा गांधी के जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले हजार किलोमीटर की पद और यदा-कदा वाहन यात्रा करके अपनी बात कहने आए कुल-जमा डेढ़ सौ लद्दाखियों को देश की राजधानी की सीमा पर रोकने की आखिर क्या वजह हो सकती…
‘महात्मा गांधी की दृष्टि, राधाकृष्ण का उद्यम’ पुस्तक का लोकार्पण 7 अक्टूबर को
पुस्तक प्रख्यात गांधीवादी विचारक के.एस. राधाकृष्ण के जीवन को समर्पित नई दिल्ली। प्रख्यात गांधीवादी विचारक व महात्मा गांधी के अनुयायी के.एस. राधाकृष्ण के जीवन को समर्पित ‘महात्मा गांधी की दृष्टि, राधाकृष्ण का उद्यम : जीवन, विचार व कार्य’ पुस्तक का…
जातिवाद के विरोधी और धर्म निरपेक्षता के सबसे बड़े हामी थे गाँधी
इंदौर। गाँधी एक ऐसे कालजयी व्यक्तितव का नाम है जिसने भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी संस्कृति का न केवल साक्षात्कर किया, उसकी तुलना में दुनियाभर के बाकी महापुरुष बोने साबित होते हैं। स्त्री- पुरुष के भेद को सबसे पहले खत्म…
गांधी का ‘डांडी मार्च‘ ‘डंडा मार्च’ में बदल दिया गया है !
प्रसंग : गांधी जयंती अलग-अलग दलों और धड़ों में बँटा देश का राजनीतिक नेतृत्व गांधी और उनके विचारों को काफ़ी पीछे छोड़ चुका है। उसके लिए ज़रूरत सिर्फ़ गांधी के आश्रमों (सेवाग्राम और साबरमती) के आधुनिकीकरण या उन्हें भी ‘सेंट्रल…
गांधी जयंती : गांधीजी की फकीरी
आम लोगों से भिन्न गांधीजी का पहनना-ओढ़ना भी एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक कार्रवाई का हिस्सा होता था। दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान पारंपरिक काठियावाडी वस्त्रों को छोड़कर लंगोट धारण करना उनकी ऐसी ही एक पहल थी। कैसे हुआ,यह बदलाव? गांधीजी…























