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चम्बल घाटी की स्मृति से दुनिया को जायेगा शांति का संदेश – राजगोपाल पी.व्ही

बागी समर्पण स्थल जौरा में देश भर आये नवजवानों ने की सर्वधर्म प्रार्थना जौरा, मुरैना। 13 अप्रैल । चम्बल घाटी का जौरा हिंसा मुक्ति, प्रतिकार मुक्ति और शोषण मुक्ति के अभियान की जननी रही है। जहां पर 1970 के दशक…

राजनीतिक परिदृश्य में डाक्टर भीमराव अंबेडकर

भारत के राजनीतिक पटल पर डॉ. अंबेडकर का आगमन जाति प्रथा के खिलाफ संघर्ष से आरंभ हुआ और गोलमेज कांफ्रेंस से लेकर ‘पूना पेक्ट,’ महात्मा गांधी से विरोध और संविधान निर्माण तक व्यापक रहा। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अहिंसक आंदोलनों…

जुबान इंद्रा नूई की, विचार गांधी के

पूंजी के शिखर पर विराजी, शीतल-पेय बनाने वाली कंपनी ‘पेप्सीको’ की सीईओ इंद्रा नूई ने हाल में अपने एक साक्षात्कार में लगभग उन्हीं चिंताओं को साझा किया है जिनके बारे में महात्मा गांधी लगातार चेतावनी देते रहते थे। फर्क सिर्फ…

स्वाभिमान पर आधारित शोषण मुक्त समाज की रचना जरूरी- प्रख्यात गांधीवादी रामधीरज भाई

जौरा में बागी आत्मसमर्पण स्वर्ण जयंती समारोह शुरू 11 अप्रैल 2022 जौरा, मुरैना। चम्बल में हुए आत्मसमर्पण से सामाजिक सम्मान की प्राप्ति और शोषण मुक्त समाज की रचना का संदेश पूरी दुनिया में गया था और 654 बागियों ने अच्छी…

पाकिस्तान में एक और शरीफ…

डॉ. सुधीर सक्सेना भारतीय उपमहाद्वीप के सभी देशों में सियासत में खानदानों के वर्चस्व की परंपरा रही है। पाकिस्तान में पीएम के कूचे से इमरान खान नियाजी की बेआबरू-विदाई के उपरांत शाहबाज शरीफ के पीएम हाउस की देहरी तक पहुंचने…

कर्ज़ के जाल में फंसे श्रीलंका : हमारा पैसा हमारा हिसाब

कर्ज़ के जाल में फंसे श्री लंका से हम क्या सीख सकते हैं? कोविड महामारी और यूक्रेन युद्ध के बाद, कई देशों की कर्ज़ की स्तिथि काफी खराब है। क्या मौजूदा आर्थिक ढांचे को बदलने का समय आ गया है?…

यादें : देश के कालजयी हिंदी संपादक और चिंतक राजेंद्र माथुर

31 वीं पुण्‍यतिथि वह राजेंद्र माथुर का पहला तार था। छतरपुर जैसे छोटे से कस्बे में किसी नौजवान पत्रकार को नईदुनिया के प्रधान सम्पादक का तार। साइकिल उठाकर पूरे शहर के परिचितों को दिखाता फिरा | वो 1977 के चुनाव…

राजेंद्र माथुर को याद करना ज़रूरी हो गया है!

पुण्‍य स्‍मरण : नौ अप्रैल पत्रकारिता जब वैचारिक रूप से अपनी विपन्नता के सबसे खराब दौर से गुज़र रही हो ,संवाद-वाहकों ने खबरों के सरकारी स्टॉक एक्सचेंजों के लायसेन्सी दलालों के तौर पर मैदान सम्भाल लिए हों, मीडिया पर सेंसरशिप…

खगोलीय घटना : अंतरिक्ष कचरे से बढ़ता खतरा

पृथ्वी पर चौबीस घंटे उल्का पिंड गिरते रहते हैं लेकिन उनका आकार बड़ा नहीं होता। पिछले सप्‍ताह मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ में हुए मेटोर शॉवर समूह में था, जो आकाश में दिखाई दिया। उल्कापिंड पुच्छल तारे के रूप में होते है।…

समाज : दंगों की दास्तान

जातियों, धर्मों, लिंगों और वर्गों में विभाजित हमारे समाज में क्या दंगे यूं ही, बे-वजह या तात्कालिक वजहों से हो जाते हैं? या फिर कईयों के सतत प्रयासों, कारनामों से इन्हें अंजाम दिया जाता है? क्या आपस की मारामार में…