स्वाभिमान पर आधारित शोषण मुक्त समाज की रचना जरूरी- प्रख्यात गांधीवादी रामधीरज भाई

जौरा में बागी आत्मसमर्पण स्वर्ण जयंती समारोह शुरू

11 अप्रैल 2022 जौरा, मुरैना। चम्बल में हुए आत्मसमर्पण से सामाजिक सम्मान की प्राप्ति और शोषण मुक्त समाज की रचना का संदेश पूरी दुनिया में गया था और 654 बागियों ने अच्छी दुनिया को बनाने के लिए अपनी बंदूकें गांधी की प्रतिमा के समक्ष समर्पित कर दिये। उक्त उद्गार जौरा में बागी आत्मसमर्पण की स्वर्ण जयंती समारोह में आये उत्तरप्रदेश सर्वोदय मण्डल के अध्यक्ष और प्रख्यात गांधीवादी रामधीरज भाई ने व्यक्त किये।

श्री रामधीरज भाई ने कहा कि खेती-किसानी को प्राथमिक सेक्टर बनाना चाहिए किंतु दुर्भाग्य से पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के अंतर्गत उद्योग धंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि खेती किसानी ही एक ऐसा उद्यम है जहां पर एक बीज से सैकड़ों अनाज या फल उगते है अन्यथा उद्योग धंधों में जितना कच्चा माल होता है उतना ही अथवा उससे कम उत्पादन होता है। खेती किसानी से देश की बहुसंख्यक आबादी जुड़ी हुई है।

ज्ञात हो कि 14 अप्रैल 1972 को जौरा में हुए बागी आत्मसमर्पण की स्वर्ण जयंती समारोह महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा में 14 अप्रैल को मनाया जा रहा है। इस समारोह में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भागीदारी के लिए देश भर से नवजवानों का पहुंचना प्रारंभ हो चुका है। सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, केरल, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलगांना और उड़ीसा के प्रतिभागी पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय युवा एकता शिविर का उद्घाटन 12 अप्रैल को सर्वोदय मण्डल उत्तरप्रदेश के अध्यक्ष श्री रामधीरज भाई, एकता परिषद के संस्थापक और गान्धी आश्रम के अध्यक्ष श्री राजगोपाल पी व्ही करेंगे।

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आश्रम के प्रबंधक प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने बताया कि समारोह में भाग लेने के लिए बिहार के सामाजिक कार्यकर्ता श्री प्रदीप प्रियदर्शी, उत्तरप्रदेश से अरविंद कुशवाहा, अनिल भाई, दिल्ली से धर्मेन्द्र, केरल से अनिल, सुकुमारन उड़ीसा के मधु भाई और तेलगांना से के. यादव राजू, महाराष्ट्र के नरेन्द्र बडगांवकर व एकता परिषद के संतोष सिंह, अनीष कुमार, के.के, डोंगर शर्मा तथा छत्तीसगढ के रमेश शर्मा  पहुंच चुके हैं।

आत्मसमर्पित बागी अजमेर सिंह, बहादुर सिंह और सोनेराम गौंड सम्मेलन में भागीदार बनने के लिए पूर्व बागी आत्मसमर्पित अजमेर सिंह, बहादुर सिंह और सोनेराम गौड भी आश्रम में आ चुके हैं। ज्ञात हो कि अजमेर सिंह चम्बल के दुर्दांत बागी मोहर सिंह व सोनेराम गौंड बागी माधो सिंह तथा बहादुर सिंह बागी हरबिलास सिंह के गिरोह के सदस्य रहे।

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