नेहरू के नेतृत्व की अहमियत
साढे सात दशक पहले बरसों की गुलामी से आजाद हुए भारत को क्या पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसा प्रधानमंत्री ही चहिए था? उनके करीब 17 साल के कामकाज को देखें तो यह सचाई खुलकर उजागर हो जाती है कि आधुनिक भारत…
कायाकल्प की कवायद : कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा
ऐसे समय में, जब विपक्ष-मुक्त भारत को अहमियत देने वाले राजनेता केन्द्र और कतिपय राज्यों की सत्ता पर काबिज हैं, प्रतिपक्ष की लोकतांत्रिक मौजूदगी साबित करना कठिन काम है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की…
अवसाद की असलियत : समझ कम, सुविधाएं नाकाफी
वैसे हमारे समाज में अवसाद कोई संकट नहीं माना जाता, लेकिन अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढती आत्महत्याओं ने इस मान्यता को खारिज कर दिया है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, यहां तक कि पंजाब सरीखे ‘हरित-क्रांति’ वाले राज्यों…
पद्मश्री, पद्मभूषण से अंलकृत सेवा (SEVA) की संस्थापिका इलाबहन भट्ट (Ela Bhatt) का निधन
लाखों गरीब महिलाओं के जीवन में फैलाया उजाला नई दिल्ली। गांधीवादी विचारक एवं सामाजिक कार्यकता, सेवा की संस्थापिका सुश्री इला बहन भट्ट (Ela Bhatt) का बुधवार (2 नवंबर) को अहमदाबाद के अस्पताल में निधन हो गया। वे 89 वर्ष की थी।…
शिक्षा : किताबें हमारी विरासत
कहा जाता है कि किताबें हमारी विरासत का दस्तावेज होती हैं और इसलिए किताबों को घर-घर में जगह दी जानी चाहिए, किताबें केवल स्कूली न हों और न ही केवल स्कूली बच्चों को पढ़नी चाहिए, अपितु सबको पढ़नी चाहिये क्योंकि…
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस : मिल-जुलकर बना मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश (छत्तीसगढ़ समेत) का गठन 1 नवम्बर 1956 को हुआ था। राज्यों के पुनर्गठन के लिए एक विशेष आयोग बनाया गया था जिसका नाम ‘राज्य पुनर्गठन आयोग’(एसआरसी) था। 1956 के पूर्व जो राज्य अस्तिव में थे उनका कोई तार्किक आधार…
‘पेसा’ के प्रभाव : कितना मानेंगे, सरकारी मोहकमे
संसद में अपने पारित होने के करीब 26 साल बाद मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटैल ने ‘पंचायत उपबंध (अधिसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम – 1996’ यानि ‘पेसा’ को लागू करने के लिए संबंधित विभागों की सहमति मांगी है। जैसा आमतौर…
बागियों को साधुता सिखाने वाले भाईजी एस. एन सुब्बराव
नब्बे की अवस्था में भी तरुणाई का ख़्वाब देखने वाले लोगों को भाईजी से प्रेरणा लेने की जरूरत है। उनके गीतों पर झूमने वाले लोगों में जय जगत का नारा प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने शांति मंत्रालय का सपना भी देखा, जो…
शांति के सिपाही : गांधी विचारनिष्ठ तुषार बाबू
तुषार बाबू अपने व्यक्तिगत जीवन में गांधी विचार के सच्चे अनुयाई थे। अपने एक रिश्तेदार के घर भोज में दलितों के लिए अलग पंगत की व्यवस्था देख उन्होंने विरोध किया और बात न मानने पर वहां से सपरिवार लौट आये…
पर्यावरण के कितने अनुकूल हैं, बिजली के वाहन?
दुनियाभर में जलवायु-परिवर्तन के भयावह प्रभाव तबाही मचा रहे हैं और ऐसे में सभी को विकास के वैकल्पिक ताने-बाने की याद सताने लगी है। कोयला, पैट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन ‘ग्रीनहाउस गैसों’ का उत्सर्जन करते हैं और नतीजे में…























