पद्मश्री, पद्मभूषण से अंलकृत सेवा (SEVA) की संस्थापिका इलाबहन भट्ट (Ela Bhatt) का निधन

लाखों गरीब महिलाओं के जीवन में फैलाया उजाला

नई दिल्ली। गांधीवादी विचारक एवं सामाजिक कार्यकता, सेवा की संस्थापिका सुश्री इला बहन भट्ट (Ela Bhatt) का बुधवार (2 नवंबर) को अहमदाबाद के अस्पताल में निधन हो गया। वे 89 वर्ष की थी। इला बहन ने भारत की महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में महत्‍वपूर्ण कार्य किये। बिना किसी प्रकार की हिंसा के महिलाओं के मुद्दों को सबके सामने लाने के उनके अनोखे तरीके के कारण उन्हें एक सौम्य क्रांतिकारी का नाम दिया गया है। 1972 में सेल्फ-एम्पलॉयड वीमन एसोसिएशन (SEVA) नामक संस्‍था की स्थापना की थी। 1972 से 1996 तक वे इस संगठन में महासचिव के रूप में काम करती रहीं। उद्यमिता के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के लिए कई क्रांतिकारी काम किए।

कई पुरस्‍कारों से सम्मानित

इला भट्ट को अपने जीवन में उल्लेखनीय कार्यों के लिए कई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।  1977 में इला रमेश भट्ट को सामुदायिक नेतृत्व श्रेणी में ‘मेग्सेसे पुरस्कार’ प्रदान किया गया। 1984 में उन्हें स्वीडिश पार्लियामेंट द्वारा ‘राइट लिवलीहुड’ अवार्ड से नवाजा गया। इला रमेश भट्ट को भारत सरकार द्वारा 1985 में ‘पद्मश्री’ की उपाधि तथा वर्ष 1986 में उन्हें ‘पद्मभूषण’ सम्मान दिया गया। साल 2011 में इला को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया। इलाबेन महात्मा गांधी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ की वाइस चांसलर भी रहीं ।

सन् 2001 में  हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें मानविकी में मानद उपाधि से सम्मानित किया। अपने पूरे जीवन में, उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण और रोजगार के लिए काम किया है और महिलाओं की मदद करने के उनके अभूतपूर्व प्रयासों के लिए उन्हें 27 मई, 2011 को रैडक्लिफ मेडल से सम्मानित किया गया था। उन्होंने जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय से मानविकी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और यूनिवर्सिटी लिब्रे डी ब्रुक्सेल्स, ब्रुसेल्स से डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी प्राप्त की।

नारी आंदोलन, मज़दूर आंदोलन और सहकारिता आंदोलन की हिमायती

इला बहन भट्ट ने भारत के पहले मज़दूर संगठन कपड़ा कारगार संघ के महिला प्रकोष्ठ के नेतृत्व से 1968 में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्‍होंने अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत असंगठित श्रम करने वाली गरीब महिलाओं को सम्पूर्ण रोज़गार दिलाने और अधिकार सम्‍पन्‍न कराने जैसे महत्‍वपूर्ण कार्य की बागडोर संभाली। सेल्फ़ इम्पलॉयड वुमॅन एसोसिएशन (सेवा) की शुरुआत इला भट्ट ने 1971 में केवल सात सदस्यों के साथ की थी। आज इसके साथ 25 लाख से ज़्यादा स्त्रियाँ जुड़ी हैं। वे इस मुहिम की बागडोर  अंतिम समय तक संभालते रहीं । यह संगठन अनपढ़ कामगार महिलाओं का अपना बैंक भी चलाता है जिसके ज़रिये औरतों को स्वरोज़गार के लिए पूँजी मुहैया करायी जाती है। स्वरोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के इनके आंकडों की बानगी आज 25 लाख से अधिक परिवार दे रहे हैं।  यह नारी आंदोलन, मज़दूर आंदोलन और सहकारिता आंदोलन का एक संगम है।

इलाबेन मुंबई की एसएनडीटी कॉलेज में शिक्षिका थीं, जिसके बाद अहमदाबाद में वकालत शुरू की। इस दौरान ही उन्‍हें टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन की महिला विंग का अध्यक्ष बनाया गया और इस संस्था को उन्होंने देश का सबसे बड़ा लेबर यूनियन बना दिया।  1955 में टीएलए (टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन) के कानूनी विभाग में शामिल हुईं।  विभाग में उनके प्रगतिशील और समर्पित कार्य ने उन्हें 1968 में महिला विंग का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।

1971 में उन्होंने इज़राइल की यात्रा की, जहां उन्होंने एफ्रो-एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर एंड कोऑपरेटिव्स में इंटरनेशनल डिप्लोमा ऑफ लेबर एंड कोऑपरेटिव्स प्राप्त किया। अरविंद बुच (टीएलए के तत्कालीन अध्यक्ष) के सहयोग से, उन्होंने टीएलए विंग की महिलाओं के तहत एक स्वरोजगार महिला संघ बनाने की पहल की। 1972 में SEWA (स्व-रोजगार महिला संघ) की स्थापना हुई और इला ने संगठन में 1996 तक महासचिव के रूप में काम किया।  इला भट्ट अपनी सेवा टीम के साथ अगले वर्ष, उन्होंने एक सेवा सहकारी बैंक की स्थापना की। इला ने 1956 में रमेश भट्ट से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं-अमीमयी और मिहिर। उनका पूरा परिवार अहमदाबाद में ही रहता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को महिला अधिकार कार्यकर्ता के निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजराती में ट्वीट किया कि इलाबेन भट्ट के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उन्हें महिलाओं के सशक्तिकरण, समाज सेवा और युवाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के उनके काम के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भट्ट ने गांधीवादी आदर्शों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और लाखों महिलाओं को सशक्त बनाकर उनके जीवन को बदल दिया। उन्होंने ट्वीट किया कि उनके निकट और प्रियजनों और उनके कई प्रशंसकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। 

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