Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

राजनीति

भारत-पाकिस्तान तीन दिन का युद्ध : न तीन के,  न 13 के !  

भारत-पाकिस्तान की तीन-दिनी झड़प से और कुछ हुआ, न हुआ हो,आजकल की सरकारों की पोल जरूर खुल गई है। सर्वशक्तिमान डोनॉल्ड ट्रंप से लगाकर चीन, रूस, तुर्किए और युद्धरत भारत व पाकिस्तान की सरकारें कुल-जमा तीन दिन की झड़प में…

युद्ध : विनाश का वैश्विक व्यापार

दुश्मन देश को धूल चटा देने, नेस्तनाबूद कर देने के मंसूबे आखिर हमें कहां ले जाते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं है कि पडौसी देशों के प्रति खुन्नस निकालने की यह ललक अमीर हथियार निर्माताओं की तिजोरियां भरने में लगी…

Waqf Amendment Act : वक्फ-संशोधन के बहाने

पहलगाम की आतंकी दुर्घटना के कारण लोगों की नजरों से थोड़ा ओझल हुए वक्फ-विवाद ने दरअसल हमारी संवैधानिक मान्यताओं और राजनीतिक शिष्टाचार पर सवाल खड़े किए हैं। वक्फ कानून में बदलाव ने कुछ जरूरी मुद्दों को उजागर किया है। वक्फ…

चौथी दुनिया और ट्रम्प की मृगमरीचिका : वैश्विक शक्ति की बदलती तस्वीर

जब तेल की समृद्धि पर सवार अरब देशों को चौथी दुनिया कहकर नई वैश्विक शक्ति माना गया था, तब भी किशन पटनायक ने उसे मृगमरीचिका कहा था। आज ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, व्यापार युद्ध और आत्मघाती फैसले उसी तरह…

पुलवामा के सवाल अनुत्तरित हैं ! बैसरन के जवाब मिलेंगे क्या ?

बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला देश को झकझोर गया है। सरकार ग़ुस्से में है और कड़ी कार्रवाई के संकेत दे रही है। हमले में 26 लोगों की जान गई। जवाबी कार्रवाई की बातों के बीच सवाल यह…

कैसे रूक पायेगा राजनीति में बढ़ता अपराधीकरण

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार 543 लोकसभा सदस्यों में से 251 (46 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनमें से 27 को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में चुने जाने वाले आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे उम्मीदवारों की…

भारतीय अर्थव्यवस्था : किनके लिए अर्थ-व्यवस्था ? 

अखबारों में भले ही ‘तीन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था’ बताकर हमारे देश को आर्थिक रूप से श्रेष्ठ देशों की पंक्ति में शामिल बताया जाता हो, लेकिन मैदानी हालात खस्ता हैं। इसकी बानगी के लिए इतना जानना ही काफी है कि देश…

भारत-अमेरिका : किसके हाथ में है, ‘ट्रम्प कार्ड’ ! 

डेढ-पौने दो महीने पहले अमेरिका ने अपने लिए जिस राष्ट्रपति का चुनाव किया था वह डोनॉल्ड ट्रम्प तेजी से समूची दुनिया को हलाकान करने में लगा है। उसने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानि ‘मागा’ के बहाने हाल के बरसों की…

बर्लिन से ज़्यादा ऊंची नफ़रत की दीवारों पर ख़ामोश हैं सत्ता प्रतिष्ठान ?

आज़ादी के बाद (या शायद पहले भी) कभी ऐसा नहीं हुआ होगा कि मस्जिदों को तिरपालों से ढाका गया हो या नमाज़ों का वक्त बदला गया हो । मुस्लिमों से कहा गया कि वे घरों के भीतर रहते हुए चल…

बेहतर समाज के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव की रक्षा करें

सत्ता पर काबिज होने की ललक ने हमारी राजनीतिक जमातों को साम्प्रदायिक बना डाला है, लेकिन क्या इससे हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे? प्रस्तुत है, इसी की पड़ताल करता कुलभूषण उपमन्यु का यह लेख। हम भाजपाई हो सकते हैं…