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वित्‍तीय संसार : सेठ की साथी सरकार

अमेरिका के ‘फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ (एफबीआई) द्वारा अडाणी पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने अव्वल तो सरकार और सेठ के सर्वज्ञात निकट संबंधों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। दूसरा और सर्वाधिक शर्मनाक खुलासा देश की…

सर्व सेवा संघ परिसर के पुनर्निर्माण पर 100 दिन के सत्याग्रह का 19 दिसंंबर को होगा समापन

राजघाट पर जुटने लगे हैं देश भर के गांधीजन और सामाजिक कार्यकर्ता वाराणसी, 18 दिसंबर। राजघाट वाराणसी स्थित सर्व सेवा संघ परिसर के पुनर्निर्माण के संकल्प के साथ विनोबा जयंती, 11 सितंबर 2024 से प्रारंभ 100 दिन का सत्याग्रह- न्याय…

भूली-बिसरी उम्मीदें – पत्रकार रामेश्वरी नेहरू

आजादी के आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी के अनेक उदाहरणों में से एक हैं – रामेश्वरी नेहरू जिन्होंने करीब एक शताब्दी पहले अपनी पत्रिका ‘स्त्री दर्पण’ की मार्फत देश, खासकर महिलाओं में अलख जगाई थी। हाल में उनकी स्मृति में…

नगर नियोजन का नजरिया : बुच साहब के बहाने भोपाल

जिस तेजी से शहरों के विकास हो रहे हैं, उसने नगर-नियोजन की अहमियत कई गुना बढ़ा दी है। इसमें उस आबादी का खास महत्व है जो आसपास के गांव-खेडों से रोजगार की आस में शहरों की तरफ खिंची चली आती…

कब तक कहते रहेंगे कि कोई डर नहीं लग रहा ?

चारों तरफ़ भय और आतंक का माहौल है। नई-नई सत्ताएँ आए दिन प्रकट हो रही हैं जो नागरिकों को डरा रही हैं। सत्ता प्रतिष्ठान या तो नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में निकम्मा साबित हो रहा है या फिर अपराधी…

समाचार

सर्व सेवा संघ का 91 वां राष्ट्रीय अधिवेशन मध्‍यप्रदेश के अनूपपुर में होगा

महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी करेंगे अधिवेशन का उद्घाटन  अनूपपुर,15 दिसंबर 2024 । सर्वोदय विचार की सर्वोच्च संस्था सर्व सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्यसमिति और अधिवेशन अनूपपुर के सर लगन पैलेस में दिनांक 22 व  23 दिसंबर को संपन्न…

‘सिफा’ का सम्मेलन : कृषि व्यवस्था को आकार देने की पहल  

‘भारतीय किसान संघ परिसंघ’ (सिफा) के तत्वावधान में भारत के किसान समुदाय को सशक्त बनाने, नवाचारों का अन्वेषण और भारतीय कृषि के भविष्य को आकार देने हेतु तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित ‘फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर ऑफ कॉमर्स’ में दो दिवसीय राष्ट्रीय किसान सम्मेलन…

मानवता के लिए सार्थक बने मानवाधिकार दिवस 

10 दिसम्बर : मानवाधिकार दिवस समाज में मानवाधिकारों के होने वाले उल्लंघन के प्रति अगर मानव ही जागरूक नहीं है तो फिर इनका औचित्य क्या है? देखे तो पता चलेगा की कितने मानवाधिकारों का हनन मानव के द्वारा ही किया…

बिजली ‘सुधार’ : मुनाफे की कीमत पर अंधेरा

वीजू कृष्‍णन रोटी, कपडा और मकान की तरह बिजली भी जीवन की बुनियादी जरूरत बन गई है। जाहिर है, इन चारों अपरिहार्य उपादानों ने सेठों को अकूत पूंजी कूटने के भरपूर अवसर दिए हैं। बिजली क्षेत्र में सरकारें, तरह-तरह के…