कोरोना के बाद हमें अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्थाएं पटरी पर लाने के लिए क्या–क्या करना होगा? मसलन-क्या हम मजदूरों के काम के घंटों समेत कई तरह की कानूनी सुविधाओं को निरस्त करने की तर्ज पर कंपनियों के मुनाफे…
हाल के वर्षों में समुद्री तूफानों ने हमारे तटीय राज्यों में भारी तबाही मचाई है। इन्हीं दिनों पश्चिमी तट के केरल, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात राज्य तूफान ‘वायु’ से उलझ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की मार से उपजे इन विचित्र…
रु.20,000 करोड़ का यह निवेश सार्वजनिक स्वास्थ्य में किया जाए सप्रेस ब्यूरो 20 मई 2020। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में नागरिक और पर्यावरण पक्षीय कानूनों में किये गए बदलावों और राष्ट्रहित को नुकसान पहुंचाने वाली विशाल परियोजनाओं को दिए…
देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 75,000 लोगों ने ‘फेसबुक लाइव’ में की हिस्सेदारी कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के 87वें स्थापना दिवस को ‘हम समाजवादी संस्थाएं’ की पहल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद के रूप में आयोजित किया गया। यह सही है कि…
मुकुट यानि क्राउन के आकार के कोरोना वायरस ने अपनी बीमारी कोविड-19 की मार्फत समूची दुनिया को हलाकान कर दिया है। इसकी उत्पत्ति की कई वजहें गिनाई जा रही हैं, लेकिन उन सबका जोड आधुनिक विकास के लिए प्रकृति से…
देशभर के वन विभागों की बुनियाद मानी जाने वाली ‘वैज्ञानिक वानिकी’ कई बार कितनी असमाजिक, अवैज्ञानिक साबित होती है, यह झारखंड राज्य के निर्माण की इस सच्ची कहानी से समझा जा सकता है। कैसे छोटा-नागपुर इलाके के संथाल, उरांव आदिवासी…
सप्रेस ब्यूरो वैश्विक स्तर पर महात्मा गांधी के संदेशों को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए दिल्ली के राजघाट से दो अक्टूबर को ‘जय जगत यात्रा’ पर निकले गांधीवादी, एकता परिषद के संस्थापक एवं जय जगत यात्रा के संचालक श्री…
कोरोना के बाद विश्व को टिकाने का रास्ता प्रकृति अनुकूलन ही है। प्रकृति के विपरीत समाजवाद में भी पूंजी की परिभाषा अच्छी नहीं थी, इसलिए पूंजीवाद और समाजवाद दोनों में ही प्राकृतिक आस्था नहीं है और प्राकृतिक संरक्षण सिमटा है। जब भी विश्व में प्रकृति के विपरीत ही सब काम होने लगे तो प्रकृति का बडा हुआ क्रोध महाविस्फोट बनता है और उससे प्राकृतिक आपदाएं निर्मित होती है। कोरोना को आपदा भी मान सकते है। महामारी केा प्रलय भी कहा जा सकता है। भारत इस महामारी से अपने परंपरागत ज्ञान आयुर्वेद द्वारा बहुत से कोरोना प्रभावितों को स्वस्थ बना सका है। बहुत लोगों के प्राण बचे है। इस आधुनिक आर्थिक तंत्र ने आयुर्वेद जैसी आरोग्य रक्षण पद्धति को सफल बनने का मौका ही नहीं दिया गया। उसने आर्थिक लाभ के लिए केवल चिकित्सा तंत्र को ही बढावा है।
सुरेंद्रसिंह शेखावत कोविड-19 से बचने के लिए लगाए गए ‘लॉक डाउन’ के तीसरे चरण में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अब कोरोना के बाद क्या? आजादी के सत्तर सालों में हमने उद्योग, शहरीकरण और मशीनीकरण का उपयोग करके देख…
वन विभाग की अध्ययन रिपोर्ट : मध्यप्रदेश में है देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा कोरोना को लेकर किये गये अध्ययन की रिपोर्ट से एक महत्पूर्ण तथ्य सामने आया है। कोरोना को ध्यान में रखते हुए प्रदेश…