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राजनीति के रहनुमा और राजनीतिक कुकर्म

राजस्‍थान की मौजूदा राजनीतिक उठापटक से और कुछ हो-न-हो, इतना पक्‍का है कि वहां के राजनेताओं को देशभर को हलाकान करने वाला कोरोना वायरस अस्तित्‍वहीन लगता है। गरीबी, भुखमरी और तिल-तिल कर मरता आम जीवन राजस्‍थान के राजनेताओं के लिए…

जनता की अदालत में देश की विधायिका

इन दिनों राजस्‍थान में और उसके पहले मध्‍यप्रदेश समेत अनेक राज्‍यों में लोकतंत्र का जो मखौल उडाया जा रहा है उसमें कौन हस्‍तक्षेप करके उसे पटरी पर ला सकता है? विधायिका की गफलतों पर अंकुश लगाने के लिए संविधान में…

बर्बाद होता अनाज और बेकार होता ‘अन्‍नदाताओं’ का श्रम

भरपूर उत्‍पादन और तीखी भुखमरी के बीच की उलटबासी के मैदानी अनुभवों की एक बडी वजह हर साल होती अनाज की बर्बादी और उसके लिए जरूरी भंडारण का अभाव है। अनाज की बर्बादी हमारे यहां सालाना होने वाली एक शर्मनाक…

‘निजता’ पर भारी ‘जीवन’ का अधिकार

कोरोना वायरस से उपजी बीमारी ‘कोविड-19’ से निपटने के लिए सरकार ने ‘आरोग्य सेतु’ नामक ‘एप’ को ‘डाउनलोड’ करना अनिवार्य कर दिया है। इस ‘एप’ की मार्फत सरकार चाहे तो किसी की भी नितांत निजी जिन्‍दगी में झांक सकती है,…

पुलिसिया दमन के पीछे है, दलितों का दोयम दर्जा

पिछले दिनों मध्‍यप्रदेश के एक गांव में खुल्‍लमखुल्‍ला पुलिस हिंसा की जो खबरें आई हैं उसने दलितों की बदहाली, पुलिस सुधार, जमीनों की नाप-जोख में वन और राजस्‍व विभागों की लापरवाही, वनाधिकार कानून जैसे कई सवालों को खडा कर दिया…

अध्‍यादेशों ने अकेला कर दिया किसान को

कोरोना संकट के एन बीचम-बीच सरकार ने जून 2020 में किसानों से जुडे तीन अध्‍यादेश जारी किए हैं। इनमें मंडी, ‘न्‍यूनतम समर्थन मूल्य,’ ‘संविदा खेती’ जैसे किसानी मुद्दों का जिक्र करते हुए मौजूदा कृषि-व्‍यवस्‍था को कॉर्पोरेट खेती के हित में…

‘देख लो आज हमको जी भर के, कोई आता नहीं फिर मर के’

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) पर ‘बाघ’  के बहाने शेरखान ‘शेर’ का विशेष साक्षात्‍कार अवनीश सोमकुंवर भारत में फिलहाल पूरी दुनिया की कुल बाघों की आबादी का 70 प्रतिशत है। देश में अभी 30,000 हाथी, 3000 एक सींग वाले गैंडे…

अभी दो बोल रहे हैं, फिर सिर्फ़ एक की आवाज़ ही सुनाई देगी !

जब देश को ही सरकार से कुछ जानने की ज़रूरत नहीं पड़ी है तो फिर राहुल गांधी अकेले को चीनी हस्तक्षेप और पीएम कैयर्स फंड आदि की जानकारी को लेकर अपना करियर और कांग्रेस का भविष्य दांव पर क्यों लगाना…

पर्यावरण नियमों में ढील – हिमालय के लिए खतरे की घंटी

10 हिमालयी राज्यों के 50 संगठनों और पर्यावरणविदों ने भेजा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को ज्ञापन हिमालयी क्षेत्र के राज्यों के 50 से अधिक पर्यावरण समूहों, संगठनों, प्रख्यात विचारकों, बुध्दिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पारिस्थितिकीय  संकट और पर्यावरणीय…

महात्मा गांधी के सामने कोरोना जैसी महामारी की चुनौती खड़ी होती तो उन्होंने क्या किया होता?

आज हम कोरोना महामारी, अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय सकंट को एक साथ झेल रहे हैं। इस संकट में हमें एक महानायक की जरूरत है। हमारे युग के सबसे बड़े नायक महात्मा गांधी हैं। अगर आज गांधी जी होते तो इस संकट…