Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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अहिंसा, सामाजिक न्याय और सौहार्द की समकालीन प्रासंगिकता पर हुई चर्चा

फ्रंटियर गांधी की विरासत पर राष्ट्रीय सेमिनार बेंगलुरु, 6 मार्च। एचकेबीकेए डिग्री कॉलेज में भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खान (फ्रंटियर गांधी) पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय था “फ्रंटियर गांधी की विरासत: अहिंसा, सामाजिक…

सागर से अंतरिक्ष तक : रक्षा विमर्श को नई दिशा देती शोधपरक कृति

भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा रक्षा विमर्श केवल सैन्य शक्ति का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामरिक चेतना का दर्पण होता है। ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘सागर से अंतरिक्ष तक:…

अपने जैसा ‘एआई’

‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ उर्फ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के कसीदे बांचते हुए हम अक्सर इस मामूली सी बात को भूल जाते हैं कि ‘एआई’ आखिरकार एक व्यक्ति और समाज की तरह हमारा ही प्रतिरूप है। यानि हम उस मशीन में जैसा और जितना…

मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी

हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर…

भगौरिया मेले में उमड़ा जनसैलाब, परंपरा के साथ दिखे राजनीति के रंग

झाबुआ से लौटकर कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट झाबुआ, 2 मार्च। आदिवासी अंचल का प्रसिद्ध लोकपर्व भगौरिया इस बार झाबुआ के उत्कृष्ट मैदान में पूरे उत्साह, परंपरा और बदलते सामाजिक-राजनीतिक रंगों के साथ देखने को मिला। होली से पहले लगने वाले…

सुप्रीम कोर्ट में आठवीं की किताब : संस्थागत गरिमा बनाम शैक्षिक स्वायत्तता

‘एनसीईआरटी’ की आठवीं की किताब ने हाल में सुप्रीमकोर्ट में भारी बहस खड़ी कर दी है। किताब में न्यायपालिका की अनेक कमजोरियों पर ऊंगली रखी गई है, लेकिन हमारा न्यायतंत्र इसे बदनाम करने का प्रयास मानता है। तो क्या हमारे…

‘ट्रेड-डील’ में सोयाबीन : पिछले दरवाजे से प्रवेश देने का कारनामा

अमरीका के साथ हुई हाल की ‘ट्रेड-डील’ के बारे में जितना, जो कुछ पता चल रहा है उससे उजागर हो रहा है कि यह ‘डील’ भारत के किसानों के लिए भांति-भांति के संकट खड़े करेगी। सोयाबीन उनमें से एक है।‘ट्रेड…

युद्ध का यशोगान : रक्षा बजट की दौड़ में उलझती दुनिया

कुछ लोग पूछते हैं कि ट्रंप की आक्रामक नीतियों पर दुनिया चुप क्यों है। कारण साफ है—जब शक्ति के साथ हथियार और आर्थिक प्रभुत्व जुड़ जाए, तो विरोध जोखिम बन जाता है। अमेरिका के बढ़ते रक्षा बजट, तकनीकी बढ़त और…

एकता परिषद : संगठन से समाज तक की यात्रा

यह जानना रोचक है कि करीब चार दशक पहले शुरु हुआ जन-संगठन ‘एकता परिषद’ अब उस समाज को अपने पैरों पर खड़ा कर पाने में सफल होता दिख रहा है जो शुरुआत में संसाधन-विहीन, निरक्षर और हाशिए पर था। यात्रा…

स्वास्थ्य बजट : बढ़ता आवंटन, घटती जवाबदेही

हमेशा की तरह इस बार भी हमने अपने बजट में वे ही कारनामे किए हैं जिनके चलते स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र साल-दर-साल फिसड्डी होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य में हमने पिछले सालों की तरह एक तरफ, भारी-भरकम आवंटित…