विचार

बैंकों में लाये जा रहे बदलाव आमजन के बजाय कॉर्पोरेट के हितों में अधिक

बैंकिंग का बदलता स्वरूप और आमजन पर उसका असर विषय पर डॉ. देवीदास तुलजापुरकर  का व्याख्यान इंदौर। बैंकों का राष्ट्रीयकरण 54 वर्ष हुआ था। तब से अब तक बैंकों की कार्यप्रणाली एवं नीतियों में बड़े बदलाव आये हैं। उदारीकरण की…

सुविधा की सड़कों पर जान क्यों इतनी सस्ती है?

देश में प्रतिदिन करीब 415 लोग यानी प्रति वर्ष डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। हमारे देश की तुलना में अमेरीका में पांच गुणा दुर्घटनाएं होती है तो जापान में लगभग हमारे देश जितनी ही, लेकिन वहां…

न्यायपालिका बनाम सरकार : कौन किसे सुधारे ?

जजों की नियुक्ति संविधान की धारा 217 के तहत होती है जिसमें आरक्षण की बात ही नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के अपने चर्चित फैसले मे साफ कहा था कि नियुक्तियों के समय समाज के सभी वर्गों के…

सादगी भरी जीवन शैली के त्रिसूत्र : श्रमनिष्‍ठ, प्रकृति सम्‍मत और मूल्‍यपरकता

National Simplicity Day 2023 सादगी से जीवन जीने के लाभ की महत्ता को बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 12 जुलाई को राष्ट्रीय सादगी दिवस (National Simplicity Day) लेखक और दार्शनिक हेनरी डेविड थोरो (Henry David Thoreau) के सम्मान में मनाया जाता…

Maharashtra : ‘दादा’ का चुनाव चिन्ह, डिटर्जेंट पाउडर और भाजपा की वाशिंग मशीन !

महाराष्ट्र Maharashtra के घटनाक्रम से भारतीय जनता पार्टी को राज्य में अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान प्राप्त हो गया है या जो कुछ चल रहा है वह अरब सागर से मुंबई के तटों पर उठने वाली किसी राजनीतिक सूनामी के…

समान नागरिक संहिता को धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखें: चर्चा का यही सही समय

 ‘सेवा सुरभि’ एवं प्रेस क्लब द्वारा संवाद में शहर के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की बेबाक राय इंदौर, 9 जुलाई। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर चर्चा करने का यही सही समय है। इस मुद्दे को किसी धर्म विशेष अथवा पार्टी…

Maharashtra political crisis : ‘मूल्यविहीन राजनीति’ को चलाने-चमकाने वाले अदाकारों की ‘राजनीति’

प्रधानमंत्री जैसी खास कुर्सी पर बैठा कोई आदमी आज देश के भ्रष्टाचारियों की सूची की सार्वजनिक घोषणा करता है और कल उन सभी भ्रष्टाचारियों को अपनी सरकार में कुर्सी पर बिठा लेता है ? मतलब, वह दिखाना चाहता है कि…

organic farming जैविक कृषि के किसान की पीड़ा : अथ श्री जैविक प्रमाणीकरण कथा . . .

राजेंद्र सिंह राठौर इन दिनों जैविक खेती organic farming की भारी धूम मची है और अब मुनाफा कूटने वाले बाजार ने भी इस पर अपना कब्जा जमा लिया है, लेकिन जैविक खेती करने वाले किसानों के साथ हो रही फजीहत…

चिंतन : भय से भयभीत समाज

व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए भय एक ऐसी बीमारी है जो सतत कमजोर करती है। लालच, प्रतिस्पर्धा, हायरार्की यानि श्रेणी-बद्धता आदि वजहों से भय फलता-फूलता है और नतीजे में एक-दूसरे से डरते हुए हम लगातार कमजोर होते जाते हैं।…

कांग्रेस का हिंदुत्व प्रेम और मोहब्बत की दुकानें

साल के आख़िर में 230 सीटों वाली विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों में प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए यही तय करना बचा है कि किस पार्टी का हिंदुत्व उसे ज़्यादा उजला दिखाई देता है! कर्नाटक में…