देश के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना (Siyang Upper Multipurpose Project – SUMP) को लेकर स्थानीय समुदायों, पर्यावरणविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से तीव्र विरोध सामने आ रहा…
राम दत्त त्रिपाठी उत्तराखंड की शांत और आध्यात्मिक नगरी कौसानी, जो महात्मा गांधी के अनासक्ति आश्रम , लक्ष्मी आश्रम और साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों एक विवाद के केंद्र में है। राज्य सरकार ने हाल ही…
बिहार के बेगूसराय में पेप्सी के बॉटलिंग प्लांट ने पानी के संकट को गंभीर बना दिया है। भूगर्भ जलस्तर 20-30 फीट तक गिर गया है, चापानल सूख गए हैं और पानी दूषित हो गया है। हर दिन 12 लाख लीटर…
देश की युवा आबादी के उलट, सत्ता पर क़ाबिज़ बुज़ुर्ग नेतृत्व न केवल औसतन बीमारियों की चपेट में है, बल्कि उनकी असल स्वास्थ्य स्थिति लौह सुरक्षा और चुप्पी के पर्दे में छिपी रहती है। क्या एक बीमार नेतृत्व एक संकटग्रस्त…
पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्यतिथि पर प्रसिद्ध समाजसेवी सोनम वांगचुक ने कहा उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् स्व० सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्यतिथि पर चिपको आंदोलन के प्रख्यात लोक कवि स्व० घनश्याम सैलानी जी को मरणोपरांत…
सीतामढ़ी,25 मई। संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा,रीगा तथा रीगा चीनी मिल मजदूर सभा के तत्वावधान में किसानों तथा कामगारों के ज्वलंत सवालों पर रबि मार्केट, रीगा के सभागार में “किसान-कामगार महापंचायत” का आयोजन किया गया। अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष पारसनाथ सिंह तथा…
सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व अवकाश पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि यह हर महिला का बुनियादी अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी संस्थान किसी महिला को उसके मातृत्व अवकाश के अधिकार से वंचित…
बानू मुश्ताक ने दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा है। उनकी किताब “हार्ट लैंप” के लिए उन्हें यह सम्मान मिला है, जो कन्नड़ भाषा में लिखी गई थी और बाद में अंग्रेजी में अनुवादित हुई। बानू मुश्ताक की…
एक तरह से देखें तो धरती पर जीवन को पैदा करने, उसे बनाए रखने और उसका पेट भरते रहने में जैव-विविधता सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जैव-विविधता के इसी उपकार को याद दिलाते रहने के लिए हर साल दुनियाभर में…
आधुनिक विज्ञान को लेकर एक विचित्र सी मान्यता है कि उसे आसानी से, बोलचाल की भाषा में समझा-समझाया नहीं जा सकता। नतीजे में विज्ञान आम समाज में रूढ-से-रूढतर और कई बार अंधविश्वास तक होता जाता है। विज्ञान को आसान बनाने…